🏜️ राजस्थान का भूगोल 🏔️

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RAS A2Z

अध्याय 1: राजस्थान का सामान्य परिचय

मरूप्रदेश, राजपूताना एवं राजस्थली जैसे नामों से प्रसिद्ध राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ भूगोल एवं इतिहास एकाकार हो गया है।

यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों ने न केवल यहाँ के इतिहास को एक दिशा दी है अपितु यहाँ के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश को निर्धारित एवं नियंत्रित करने में भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में राजस्थान की विशिष्ट पहचान बनायी है।

राजस्थान की भू-गर्भिक संरचना

राजस्थान का भू-आकृतिक स्वरूप अत्यधिक विशिष्ट एवं विविधताओं से युक्त है। यहाँ आकियन एवं प्री-केन्द्रियन युग की संरचनाएँ साथ-साथ दृष्टिगत होती हैं।

(1) आद्य महाकल्प

क्र.उपविभागविवरण
1अरावली पूर्वकैन्धियन से पहले आद्य महाकल्प के शैल पूर्वोत्तर में दिल्ली के उत्तर व दक्षिण-पश्चिम में खम्भात की खाड़ी तक अरावली पर्वतमाला के रूप में विस्तृत है। भीलवाड़ा सुपर ग्रुप (110 किमी) प्रसिद्ध है।
2प्री-केन्धियनअरावली महासमूह व देहली महासमूह का निर्माण। अरावली महासमूह—फायलाइट्स, क्वार्टिजाइट व डोलोमाइट्स। देहली महासमूह—अजमेर व पश्चिम मेवाड़ में।

(2) पुराजीवी महाकल्प

  • विध्यन महासमूह: पूर्वी राजस्थान के विध्य बेसिन में। पश्चिमी राजस्थान में नागौर व बिरमानिया बेसिन।
  • परिमयन कार्बोनिफेरस: बाप बोल्डर बेड (जोधपुर/फलौदी), भादुरा बालूकाश्म।

(3) मध्यजीवी महाकल्प

  • क्रिटेशियस युग: आबू, पारवार, फतेहगढ़ श्रेणी।
  • जुरैसिक युग: बेडेसर, बैशाखी, जैसलमेर, लाठी श्रेणी।

(4) नवजीवी महाकल्प

  • तृतीयक कल्प: नागौर, बीकानेर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर।
  • चतुर्थ कल्प: जलोढ़ व बालू रेत का निर्माण।

राजस्थान का उच्चावच / धरातल

भौगोलिक प्रदेशनिर्माण काल
अरावली पर्वतीय प्रदेशआद्य महाकल्प के प्री-कैम्ब्रियन काल में
दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेशक्रिटेशियस काल में ज्वालामुखी उदगार से
पूर्वी मैदानी प्रदेशचतुर्थ महाकल्प में प्लेस्टोसिन काल में
पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेशचतुर्थ महाकल्प के प्लेस्टोसिन कल्प में
🔹 विशेषज्ञ जोड़: अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त के अनुसार सम्पूर्ण विश्व एक पिण्ड के समान था जिसे पैंजिया कहा जाता था, जो चारों ओर से पेंथालासा महासागर से घिरा हुआ था। कालान्तर में पेंजिया के टूटने पर 2 भाग बने—उत्तरी भाग अंगारालेण्ड व दक्षिणी भाग गौडवाना लैण्ड तथा दोनों के बीच टेथिस महासागर का निर्माण हुआ।

राजस्थान का निर्माण

राजस्थान प्राचीन काल से मानव को आकर्षित करता रहा है तथा विभिन्न प्राचीन सभ्यताओं जैसे—कालीबंगा, रंगमहल, बागौर, नगरी, आहड़, बैराठ व बालाथल आदि से जुड़ा हुआ है।

प्राचीन नाम व वर्तमान नाम

प्राचीन नामवर्तमान नामप्राचीन नामवर्तमान नाम
यौद्धेयगंगानगर के आसपासविराटजयपुर-टोंक
कुरुअलवर का समीपवर्ती क्षेत्रचन्द्रावती/अबुदसिरोही-आबू क्षेत्र
शौरसेनभरतपुर, करौली, धौलपुरशिविमेवाड़/उदयपुर
जांगलबीकानेर क्षेत्रहयहयकोटा-बूँदी
अहिच्छत्रपुरनागौरजाबालीपुर/स्वर्णगिरीजालौर
गुजर प्रदेशजोधपुर-पालीपाल्लनझालावाड़
श्रीमाल/भीनमालजालौरकांठलप्रतापगढ़
वल्ल प्रदेश/दुंगलजैसलमेरव्याघ्रघाटबाँसवाड़ा
📌 नवीनतम अपडेट: 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तब राजस्थान में 19 रियासतें, 3 देशी ठिकाने (लावा, नीमराना, कुशलगढ़) एवं 1 केन्द्रशासित प्रदेश अजमेर-मेरवाड़ा था। राजस्थान का निर्माण 7 चरणों में 1 नवम्बर 1956 को पूरा हुआ।

राजस्थान एकीकरण (7 चरण)

चरणनामतिथिसम्मिलित रियासतेंराजधानीप्रधानमंत्री
1मत्स्य संघ18 मार्च 1948अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुरअलवरशोभाराम कुमावत
2पूर्व राजस्थान संघ25 मार्च 1948झुंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़, बूँदी, टोंक, कोटा, झालावाड़, शाहपुराकोटागोकुल लाल असावा
3संयुक्त राजस्थान18 अप्रैल 1948पूर्व राजस्थान + उदयपुरउदयपुरमाणिक्यलाल वर्मा
4वृहत राजस्थान30 मार्च 1949संयुक्त राजस्थान + जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेरजयपुरहीरालाल शास्त्री
5संयुक्त वृहत राजस्थान15 मई 1949वृहत राजस्थान + मत्स्य संघजयपुरहीरालाल शास्त्री
6राजस्थान26 जनवरी 1950सिरोही (दिलवाड़ा व आबूरोड छोड़कर)जयपुरहीरालाल शास्त्री
7पुनर्गठित राजस्थान1 नवम्बर 1956उपर्युक्त सभी + अजमेर, आबूरोड, सुनेल टप्पाजयपुरहीरालाल शास्त्री

अध्याय 2: राजस्थान का नामकरण

  • ऋग्वेद में — ब्रह्मवर्त
  • वाल्मीकि द्वारा — मरूकान्तार
  • बसंतगढ़ शिलालेख में — राजस्थानादित्य (625 ई./682 विक्रम संवत, खीमत माता मंदिर, सिरोही)
  • सर्वप्रथम 'राजस्थान' शब्द का उल्लेख — मुहणोत नैणसी री ख्यात में
  • जॉर्ज थॉमस द्वारा — राजपूताना (1805 ई., विलियम फ्रेकलिन की पुस्तक "मिल्ट्री मेमोयर्स ऑफ मिस्टर जार्ज थॉमस")
  • कर्नल जेम्स टॉड द्वारा — राजस्थान (पुस्तक: "द एनाल्स एण्ड एन्टीक्विटीज ऑफ राजस्थान", 1829 ई., लंदन)
  • संवैधानिक मान्यता — 26 जनवरी 1950
  • वर्तमान स्वरूप — 1 नवम्बर 1956

अध्याय 3: राजस्थान की स्थिति

सूर्य के सापेक्ष स्थिति

  • कर्क संक्रांति (21 जून): सबसे बड़ा दिन, सबसे छोटी रात, सबसे छोटी परछाई।
  • मकर संक्रांति (22 दिसम्बर): सबसे बड़ी रात, सबसे छोटा दिन, सबसे लम्बी परछाई।
  • सूर्योदय एवं अस्त सबसे पहले सिलाना (धौलपुर) में, सबसे अन्त में कटरा (जैसलमेर) में।
  • दिन में सूर्य सर्वाधिक सीधा जोधपुर में चमकता है।
  • सबसे सीधा सूर्य बाँसवाड़ा में, सबसे तिरछा गंगानगर में।

अक्षांशीय विस्तार

  • 23°03' से 30°12' उत्तरी अक्षांश
  • उत्तरी बिन्दु: कोणा गांव (श्रीगंगानगर)
  • दक्षिणी बिन्दु: बोरकुण्डा (बाँसवाड़ा)
  • उत्तर से दक्षिण की दूरी: 826 किमी
  • अक्षांशीय विस्तार: 7°9'
  • कर्क रेखा 2 जिलों से गुजरती है (बाँसवाड़ा 25 किमी + डूंगरपुर 1 किमी) = कुल 26 किमी
  • छौछ गांव (बाँसवाड़ा) पूर्णतः कर्क रेखा पर स्थित

देशान्तरीय विस्तार

  • 69°30' से 78°17' पूर्वी देशान्तर
  • पश्चिमी बिन्दु: कटरा गांव (जैसलमेर)
  • पूर्वी बिन्दु: सिलाना गांव (धौलपुर)
  • पश्चिम से पूर्व की दूरी: 869 किमी
  • देशान्तरीय विस्तार: 8°47'
  • पूर्व एवं पश्चिम में समय का अंतर: 35 मिनट 8 सेकण्ड

राजस्थान की आकृति

  • विषमकोणीय चतुर्भुज या पतंगाकार
  • T.H. हेण्डले के अनुसार — Rhombus के समान
  • मध्य गाँव: लाम्पोलाई (नागौर)
  • सैटेलाइट सर्वे के अनुसार मध्य गाँव: गगराना (नागौर)

राजस्थान का क्षेत्रफल

  • कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किमी
  • भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41% (सबसे बड़ा राज्य)
  • विश्व के क्षेत्रफल का 0.25%
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से तुलना: कांगो, जर्मनी, नॉर्वे, पोलैण्ड, वियतनाम, फिनलैण्ड, जापान के बराबर
  • ब्रिटेन से दोगुना, श्रीलंका से 5 गुणा, इजराइल से 17 गुणा बड़ा

राजस्थान की सीमा

  • कुल स्थलीय सीमा: 5920 किमी
  • अन्तर्राष्ट्रीय सीमा: 1070 किमी (रेडक्लिफ रेखा, 17 अगस्त 1947)
  • अन्तर्राज्यीय सीमा: 4850 किमी
  • सर्वाधिक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा: जैसलमेर
  • न्यूनतम अन्तर्राष्ट्रीय सीमा: फलौदी
  • सर्वाधिक अन्तर्राज्यीय सीमा: झालावाड़ (मध्यप्रदेश, 520 किमी)
  • न्यूनतम अन्तर्राज्यीय सीमा: बाड़मेर (गुजरात, 14 किमी)

अध्याय 4: राजस्थान के जिले एवं संभाग

रामलुभाया समिति (21 मार्च 2022)

गहलोत सरकार द्वारा 17 नवीन जिलों और 3 संभागों का सृजन किया गया। जिसके पश्चात् राजस्थान में जिलों की संख्या 33 से बढ़कर 50 तथा संभागों की संख्या 7 से बढ़कर 10 हो गयी।

ललित के पंवार समिति (28 जून 2024)

  • अध्यक्ष: ललित के. पंवार
  • कार्य: 17 जिलों व 3 संभाग की समीक्षा
  • 28 दिसम्बर 2024 को 9 जिलों के सृजन को रद्द किया गया
📌 नवीनतम स्थिति (2025): वर्तमान में राजस्थान में 41 जिले और 7 संभाग हैं। रद्द किये गये 9 जिले: अनूपगढ़, दूदू, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, केकड़ी, नीम का थाना, सांचौर, शाहपुरा।

राजस्थान में संभागीय व्यवस्था

क्र.संभागजिले
1कोटाकोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ (4)
2बीकानेरबीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू (4)
3उदयपुरउदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, राजसमंद, झूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर (7)
4जोधपुरजोधपुर, पाली, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, बालोतरा, फलौदी (8) — सर्वाधिक जिलों वाला संभाग
5भरतपुरभरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर (5)
6अजमेरअजमेर, नागौर, टोंक, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, ब्यावर (6)
7जयपुरजयपुर, दौसा, अलवर, सीकर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड (7)

अध्याय 5: राजस्थान के भू-आकृतिक प्रदेश

महाद्वीपीय विस्थापन का सिद्धान्त (वेगनर, 1912)

अल्फ्रेड वेगनर (जर्मनी) — पैंजिया, पेंथालासा, अंगारालेण्ड, गौडवाणालेण्ड, टेथिस सागर।

राजस्थान का सर्वप्रथम भौतिक विभाजन

  • प्रो. वी.सी. मिश्रा (1968): 7 भाग
  • ए.के. सेन (1968)
  • रामलोचन सिंह (1971)
  • हरिमोहन सक्सेना (1994): 4 भाग — पुस्तक "राजस्थान का भूगोल"

भौतिक प्रदेशों का तुलनात्मक अध्ययन

भौतिक प्रदेशनिर्माण कालक्षेत्रफलजनसंख्याजिले
पश्चिमी मरूस्थलीयप्लीस्टोसीन काल61.11%40%16
अरावलीप्री-कैम्प्रियन काल9%10%13
पूर्वी मैदानीप्लीस्टोसीन काल23%39%13
हाड़ौती पठारक्रिटेशियस काल6.89%11%7

पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश

  • अरावली के पश्चिम में विस्तृत, थार मरूस्थल (टेथिस सागर का अवशेष)
  • क्षेत्रफल: 61.11% (2,38,254 वर्ग किमी)
  • लम्बाई: 640 किमी, चौड़ाई: ~300 किमी, औसत ऊँचाई: 200-300 मीटर
  • प्रमुख नदी: लूनी
  • मृदा: रेतीली/बालू
  • वनस्पति: जिरोपाईट (मरुद्भिद व काँटेदार)
  • खनिज: अधात्विक व ऊर्जा खनिज (पेट्रोलियम गैस)
  • प्रमुख चट्टानें: अवसादी

मरूस्थल का विभाजन (बनावट के आधार पर)

प्रकारविवरणविस्तार
रेतीला/महान मरूस्थलअत्यधिक बालूका स्तूप, 'धोरा' कहलाते हैंजैसलमेर (सर्वाधिक)
पथरीला मरूस्थलचट्टानों व शुष्कता के कारण बालूका स्तूप नहीं, 'हम्माद/हम्मादा'फलौदी, पोकरण, छप्पन की पहाड़ी
मिश्रित मरूस्थलबालूका स्तूपों के साथ कंकड़-पत्थर, 'रैग'जालौर, बाड़मेर, झुंझुनूं, सीकर

अर्द्ध शुष्क मरूस्थल (बांगर प्रदेश)

औसत वर्षा: 25-50 सेमी, जलवायु: अर्द्धउष्ण

  • घग्घर बेसिन: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (हरित घाटी प्रदेश)
  • शेखावाटी प्रदेश: चूरू, सीकर, झुंझुनूं, डीडवाना-कुचामन उत्तरी भाग
  • नागौर उच्च भूमि: नागौर व डीडवाना-कुचामन (खारे पानी की झीलें)
  • लूनी बेसिन: अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर (गोडवाड़ बेसिन/नेहड़ रण)

अरावली पर्वतीय प्रदेश

  • निर्माण: प्री-कैम्ब्रियन काल (आद्य महाकल्प)
  • विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत शृंखला
  • गुजरात के पालनपुर से दिल्ली की रायसीना हिल्स तक 692 किमी
  • राजस्थान में कुल लम्बाई: 550 किमी (79.48%)
  • औसत ऊँचाई: 930 मीटर
  • सर्वोच्च चोटी: गुरुशिखर (1722 मीटर, सिरोही)
  • सबसे ऊँचा शहर: माउंट आबू (1200 मीटर)
  • निम्नतम पॉइंट: पुष्कर घाटी, अजमेर
  • दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व
  • तुलना: USA के अप्लेशियन पर्वत से

अरावली के अन्य नाम

नामद्वारा/क्षेत्र
हिन्दू ओलम्पसजेम्स टॉड
आबू-गुलाबसिरोही में
आडावालाबूँदी में
उक्तंट की गर्दनअबुल फजल
आड़ा-वटाउदयपुर में
परिपत्रविष्णुपुराण

अरावली की प्रमुख चोटियाँ

क्र.चोटीजिलाऊँचाई (मीटर)
1गुरुशिखरसिरोही1722
2सेरसिरोही1597
3दिलवाड़ासिरोही1442
4जरगाउदयपुर1431
5अचलगढ़सिरोही1380
6आबूसिरोही1295
7कुंभलगढ़राजसमंद1224
8घोलियाउदयपुर1183
9जयसिरोही1090
10रघुनाथगढ़सीकर1055

अरावली का विभाजन

भागविस्तारसर्वोच्च शिखरचट्टानें
उत्तरी अरावलीसिंधाना (झुंझुनूं) से सांभर (जयपुर)रघुनाथगढ़ (1055 मी.)क्वार्टजाइट व फाईलाइट
मध्य अरावलीसांभर से देवगढ़ (राजसमंद)मालखेत (1052 मी.)संगमरमर, क्वार्टजाइट
दक्षिणी अरावलीदेवगढ़ से सिरोही तकगुरुशिखर (1722 मी.)ग्रेनाइट

पूर्वी मैदानी प्रदेश

  • निर्माणकाल: प्लीस्टोसीन काल (नदियों द्वारा जमा अवसादों से)
  • विस्तार: अरावली एवं हाड़ौती पठार के मध्य
  • क्षेत्रफल: 23%, जनसंख्या: 39%
  • मृदा: जलोढ़ (दोमट)
  • जलवायु: आर्द्र
  • राजस्थान का सर्वाधिक उपजाऊ प्रदेश

चम्बल बेसिन

चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, कोटा, बूँदी — बीहड़/डांग क्षेत्र (खादर)

  • सर्वाधिक अवनालिका अपरदन: कोटा (1,32,600 हेक्टेयर)
  • बीहड़ की रानी: करौली, डांग का राजा: धौलपुर

बनास-बाणगंगा बेसिन

  • मेवाड़ का मैदान (चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा) — मक्का सर्वाधिक
  • मालपुरा-करीली का मैदान (अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर)
  • बाणगंगा का मैदान: जयपुर, दौसा, भरतपुर (रोही का मैदान)

माही बेसिन

बाँसवाड़ा, झूंगरपुर, प्रतापगढ़ — छप्पन का मैदान, भाटी का मैदान, कांठल का मैदान। मृदा: लाल चिकनी (लेटेराइट)। फसलें: मक्का (माही कंचन, माही धवल), चावल (माही सुगंधा)।

दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश / हाड़ौती पठार

  • अन्य नाम: हाड़ौती पठार, माल प्रदेश, संक्रांति प्रदेश
  • निर्माण: क्रिटेशियस काल (गोंडवाना लैंड में ज्वालामुखी के दरारी उदगार से)
  • औसत ऊँचाई: 500 मीटर
  • क्षेत्रफल: 6.89%, जनसंख्या: 11%
  • मृदा: काली, सर्वोच्च भाग: चाँदखेड़ी (झालावाड़) 517 मीटर
  • जिले: कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़
  • प्रमुख नदियाँ: चंबल, कालीसिंध, पावती, परवन
  • प्रमुख पहाड़ियाँ: मुकंदरा हिल्स, बूँदी हिल्स

हाड़ौती पठार के भाग

  • दक्कन लावा पठार: बिजौलिया (भीलवाड़ा) से भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के मध्य — ऊपरमाल का पठार
  • विध्यन कगार: चूना-पत्थर सम्पन्न (कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़)
  • शाहबाद उच्च क्षेत्र: बारां जिले का पूर्वी भाग, सर्वोच्च शिखर: कस्बा थाना (456 मी.)
  • डग-गंगाधर क्षेत्र: झालावाड़ जिला, औसत ऊँचाई 450 मीटर
  • अर्द्धचन्द्राकार पहाड़ियाँ: बूँदी हिल्स (सर्वोच्च: सतूर 353 मी.), मुकंदरा हिल्स (सर्वोच्च: चाँदखेड़ी 517 मी.)

राजस्थान के प्रमुख पठार

क्र.पठारजिलाऊँचाईविशेष
1उड़िया पठारसिरोही1360 मी.राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार
2भोराट का पठारउदयपुर-राजसमंद1225 मी.दूसरा सबसे ऊँचा
3आबू का पठारसिरोही1200 मी.गुम्बदाकार, बैथोलिश संरचना
4लसाड़िया का पठारसलूम्बरजयसमंद झील के पूर्व
5मेसा का पठारचित्तौड़गढ़चित्तौड़गढ़ दुर्ग
6मानदेसरा का पठारचित्तौड़गढ़भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य
7कांकणबाड़ी व क्रास्काअलवरसरिस्का अभयारण्य
8ऊपरमाल का पठारचित्तौड़गढ़-भीलवाड़ाभैंसरोड़गढ़ से बिजौलिया
9धीराजी का पठारचित्तौड़गढ़

अध्याय 6: राजस्थान की जलवायु

राजस्थान में उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। राजस्थान की स्थिति शीतोष्ण कटिबंध में है तथा 2 जिले बाँसवाड़ा एवं डूंगरपुर उष्ण कटिबंध में आते हैं।

जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

  1. अक्षांशीय स्थिति: 23°3' से 30°12' उत्तरी अक्षांश
  2. समुद्र से दूरी: अरब सागर से ~350 किमी दूर, महाद्वीपीय जलवायु
  3. उच्चावच: अधिकांश भाग समुद्रतल से 370 मी. से ऊँचा
  4. पर्वतों की दिशा: अरावली दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व (मानसून के समानान्तर)
  5. धरातल की ऊँचाई: माउंट आबू का तापमान जमाव बिंदु तक

जलवायु का वर्गीकरण (सामान्य)

प्रदेशविस्तारवर्षातापमान (ग्रीष्म/शीत)वनस्पतिप्रतिनिधि नगर
शुष्कजैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, फलौदी, गंगानगर0-20 सेमी45-50°C / 0-8°Cमरुद्भिदजैसलमेर
अर्द्ध शुष्कअरावली के पश्चिम20-40 सेमी36-42°C / 10-17°Cस्टेपीजोधपुर
उप आर्द्रअरावली पर्वतीय40-60 सेमी28-36°C / 12-18°Cमिश्रित पतझड़जयपुर
आर्द्रदक्षिणी पूर्वी मैदानी60-80 सेमी30-34°C / 14-17°Cमानसूनी/पतझड़सवाई माधोपुर
अति आर्द्रदक्षिणी व दक्षिण पूर्वी (हाड़ौती)80-100 सेमी30-40°C / 12-18°Cसवानाझालावाड़

कोपेन द्वारा वर्गीकरण

प्रदेशविस्तारप्रतिनिधि नगरवनस्पति
BWhw (उष्ण शुष्क)जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, फलौदीबीकानेरमरुद्भिद
BShw (अर्द्ध शुष्क)लूनी बेसिन, घग्घर बेसिन, नागौर, शेखावाटीनागौरस्टेपी
Cwg (उपआर्द्र)अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, डीग, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, राजसमंद, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुरटोंकमानसूनी/पतझड़
Aw (उष्ण कटिबंधीय आर्द्र)कोटा, बारां, झालावाड़, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूम्बर, माउंट आबूडूंगरपुरसवाना

थॉनवेट द्वारा वर्गीकरण

प्रदेशविस्तारवर्षावनस्पति
CA'w (उपआर्द्र)डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़, सलूम्बर, पूर्वी उदयपुर80-100 सेमीसवाना व पतझड़
DA'w (उष्ण आर्द्र)अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, डीग, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, ब्यावर, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, सिरोही, पाली, सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, राजसमंद, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर, नागौर, बूँदी, जोधपुर50-80 सेमीअर्द्ध मरूस्थलीय
DB'w (अर्द्ध मरूस्थलीय)बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, उत्तरी झुंझुनूं20-40 सेमीकंटीली
EA'd (उष्ण मरूस्थलीय)जैसलमेर, बाड़मेर, पश्चिमी जोधपुर, पश्चिमी बीकानेर, फलौदी10-20 सेमीमरुद्भिद

ऋतुओं के आधार पर जलवायु

ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून)

  • औसत तापमान: 30-40°C
  • लू: गर्म एवं शुष्क हवाएँ
  • आंधी: धूलभरी एवं नमीयुक्त हवाएँ (सर्वाधिक: श्रीगंगानगर, 27 दिन)
  • भभूल्या/फुटाल्या: धूलभरी एवं चक्रवातीय हवाएँ (सर्वाधिक: बीकानेर)
  • सर्वाधिक तापमान वाला जिला: चूरू (50°C)
  • सर्वाधिक तापमान वाला स्थान: फलौदी (52°C)
  • न्यूनतम तापमान: माउंट आबू

वर्षा ऋतु (मध्य जून से सितम्बर)

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून की 2 शाखाएँ: अरब सागर शाखा (10% वर्षा) व बंगाल की खाड़ी शाखा (90% वर्षा)
  • मानसून का प्रवेश: बाँसवाड़ा (15 जून)
  • सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: झालावाड़ (राजस्थान का चेरापूँजी)
  • सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान: माउंट आबू (150 सेमी)
  • न्यूनतम वर्षा वाला जिला: जैसलमेर (10 सेमी)
  • न्यूनतम वर्षा वाला स्थान: सम (जैसलमेर) — 0 सेमी
  • औसत वार्षिक वर्षा: 57.5 सेमी (575 मिमी)

शरद ऋतु (अक्टूबर-नवम्बर)

  • मानसून प्रत्यावर्तन की ऋतु
  • अक्टूबर क्यार: उमस भरी गर्मी
  • कार्तिक मास की उष्मा

शीत ऋतु (मध्य नवम्बर से मध्य मार्च)

  • सबसे ठण्डा जिला: चूरू
  • सबसे ठण्डी एवं बड़ी रात: 22 दिसम्बर
  • सबसे ठण्डा स्थान: माउंट आबू (राजस्थान का शिमला)
  • मावठ: शीत ऋतु में अल्पवर्षा (गोल्डन ड्राप्स) — रबी फसल के लिए लाभदायक
  • शीतलहर: साइबेरिया से आने वाली शुष्क शीत पवनें (सर्वाधिक प्रभावित: चूरू, सीकर, बीकानेर)
🔹 विशेषज्ञ जोड़ (परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण):
  • समवर्षा रेखाएँ: 25 सेमी (मरूस्थल को 2 भागों में), 50 सेमी (अरावली पर — पश्चिमी मरूस्थल एवं पूर्वी मैदान को अलग करती है)
  • मानसून प्रस्फोट: मानसून के शुरूआत में तेज वर्षा (जुलाई)
  • मानसून प्रतिष्ठेदन: प्रस्फोट के बाद 2-3 सप्ताह वर्षा न होना (अगस्त-सितम्बर)
  • प्री-मानसून: मानसून से पहले वर्षा (दोगड़ा)
  • अनावृद्धि: वर्षा का कम होना (हर 4-5 वर्ष में)
  • अतिवृद्धि: 24 घंटे में 20-25 सेमी वर्षा
  • ओलावृद्धि: चक्रवातों के प्रभाव से ओले (सर्वाधिक: जयपुर)
  • अलनीनो: प्रशान्त महासागर का सतही जल गर्म — मानसून कमजोर
  • ला-निनो: प्रशान्त महासागर का सतही जल ठण्डा — अधिक वर्षा

जलवायु की विशेषताएँ

  • उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु
  • 90% से अधिक वर्षा मानसून काल में
  • दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर अधिक (सर्वाधिक वार्षिक: चूरू, सर्वाधिक दैनिक: जैसलमेर)
  • वर्षा का असमान वितरण
  • अनिश्चितता एवं अपर्याप्त वर्षा
  • खण्ड वृष्टि

अध्याय 7: राजस्थान की नदियाँ

राजस्थान के अपवाह तंत्र में 15 मुख्य बेसिन एवं 58 उप बेसिन सम्मिलित हैं। भारत के कुल सतही जल एवं नदियों के जल में राजस्थान का योगदान 1.16% है। भूमिगत जल में 1.72%

अपवाह तंत्र का वर्गीकरण

अपवाह तंत्रप्रतिशतप्रमुख नदियाँ
अरब सागरीय17%लूनी, माही, पश्चिमी बनास, साबरमती
बंगाल की खाड़ी23%चम्बल, बनास, बेडच, गंभीर
अंतः प्रवाह60%घग्घर, कांतली, काकनी, साबी, रूपारेल, रूपनगढ़, बाणगंगा, मेथा

अरब सागरीय अपवाह तंत्र

(1) लूनी नदी

  • अन्य नाम: सागरमती (अजमेर), सरस्वती, लवणमती, मारवाड़ की गंगा, आधी मीठी-आधी खारी, साक्री (पुष्कर में), अंतः सलिला (कालीदास)
  • उद्गम: नाग पहाड़ (अजमेर)
  • संगम: कच्छ रन (गुजरात)
  • कुल लम्बाई: 495 किमी (राजस्थान में 330 किमी)
  • प्रवाह क्षेत्र: 7 जिले (अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर)
  • लूनी बेसिन का विस्तार 13 जिलों में (सर्वाधिक: पाली > जालौर > बाड़मेर)
  • पश्चिमी राजस्थान की सबसे लम्बी नदी
  • प्रवाह क्षेत्र: गोडवाड़ प्रदेश
  • सर्वाधिक सहायक नदियाँ पाली जिले से
  • राजस्थान की सर्वाधिक जल ग्रहण क्षेत्र वाली नदी (69302 वर्ग किमी)
लूनी की सहायक नदियाँ
नदीउद्गमसंगम
जोजड़ीपुंदलू गाँव (नागौर)खेजड़ली खुद (जोधपुर) — दायीं ओर से, अरावली से नहीं
जवाई (सबसे बड़ी)गोरिया गाँव (पाली)हेमगुढ़ा (जालौर)
बांडीफुलाद गाँव (पाली)लाखर गाँव — सबसे प्रदूषित नदी (रासायनिक नदी)
लीलड़ीजवाजा (अजमेर/ब्यावर)पाली
खारीशेरगाँव की पहाड़ी (सिरोही)सायला (जालौर) — जवाई में
सूकड़ीदेसूरी (पाली)समदड़ी (बालोतरा) — बांकली बाँध
मीठड़ीपालीमंगला (बालोतरा)
सागीजसवंतपुरा की पहाड़ी (जालौर)गाधव (बालोतरा)
गुहियासोजत (पाली)बांडी में
लूनी की बाँध परियोजनाएँ
बाँधजिलानदी
जसवंत सागर (पिचियाक)जोधपुरलूनी
जवाई बाँधपालीजवाई (मारवाड़ का अमृत सरोवर)
हेमावास बाँधपालीबांडी
बांकली बाँधजालौरसूकड़ी

(2) माही नदी

  • अन्य नाम: वागड़ की गंगा, कांठल की गंगा, आदिवासियों की गंगा, दक्षिण राजस्थान की स्वर्ण रेखा
  • उद्गम: मेहन्द द्रौल (धार, मध्यप्रदेश)
  • संगम: खम्भात की खाड़ी (गुजरात)
  • प्रवाह क्षेत्र: डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा (उल्टे U आकार)
  • राजस्थान में प्रवेश: खांदू गाँव (बाँसवाड़ा)
  • कुल लम्बाई: 576 किमी (राजस्थान में 171 किमी)
  • कर्क रेखा को 2 बार काटती है
  • एकमात्र नदी जिसका प्रवेश व निकास दक्षिण से
  • माही बेसिन: 6 जिले (सर्वाधिक: बाँसवाड़ा > उदयपुर-सलूम्बर > प्रतापगढ़)
  • त्रिवेणी संगम: बेणेश्वर (नवाटापरा गाँव, डूंगरपुर) — सोम, माही, जाखम
  • बेणेश्वर धाम: आदिवासियों का कुम्भ
  • 100 टापुओं का शहर: बाँसवाड़ा
माही की सहायक नदियाँ
नदीउद्गमसंगम
सोम
जाखमसीतामाता अभयारण्य से गुजरती
ऐरावप्रतापगढ़ की पहाड़ियाँसेमेलियां गाँव (बाँसवाड़ा)
अनासआम्बेर गाँव (MP)गलियाकोट के बाद
चापकालिंजरा पहाड़ियाँ (बाँसवाड़ा)बाँसवाड़ा
मोरेनझूंगरपुरगलियाकोट के निकट
भादरझूंगरपुरकडाना बाँध के बाद
ईरूमाही बजाज सागर बाँध के पास
माही की बाँध परियोजना
  • माही बजाज सागर: बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा) — राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध (3109 मी.)
  • कागदी पिकअप: बाँसवाड़ा
  • कडाना बाँध: रामपुर (माहीसागर, गुजरात)
  • माही परियोजना में हिस्सेदारी: राजस्थान 45% + गुजरात 55%
  • कुल जल विद्युत उत्पादन: 140 MW, राजस्थान 100% प्राप्त करता है

(3) पश्चिमी बनास

  • उद्गम: नया सनवारा की पहाड़ियाँ (सिरोही), अरावली के पश्चिमी ढाल
  • संगम: कच्छ का रन (गुजरात)
  • कुल लम्बाई: 266 किमी (राजस्थान में 50 किमी)
  • सहायक नदी: सूकली/सीपू
  • सूकड़ी सेलवाड़ा बाँध परियोजना: सिरोही

(4) साबरमती नदी

  • उद्गम: पदराना पहाड़ी (उदयपुर) — वाकल व सेंई धाराओं के मिलने से
  • संगम: खम्भात की खाड़ी (गुजरात)
  • कुल लम्बाई: 416 किमी (राजस्थान में 45 किमी)
  • भारत की सर्वाधिक प्रदूषित नदी
  • फुलवारी की नाल के मध्य 5 सरिताओं में विभक्त
  • राजस्थान की प्रथम नदी जिस पर रिवर फ्रंट (अहमदाबाद) बना
साबरमती की सहायक नदियाँ
नदीउद्गमसंगम
वाकलगोरा गाँव (गोगुन्दा, उदयपुर)मऊ पीपली (गुजरात)
सेईपादरना गाँव (उदयपुर)गुजरात में साबरमती में

देवास सुरंग: उदयपुर की झीलों में साबरमती का जल पहुँचाने के लिए 11.6 किमी लम्बी जल सुरंग — राजस्थान की सबसे लम्बी जल सुरंग।

बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र

(1) चम्बल नदी

  • अन्य नाम: कामधेनू, चमण्यवती, नित्यवाही, बारहमासी, मालवगंगा
  • उद्गम: जनापावा की पहाड़ियाँ (महू, मध्यप्रदेश)
  • संगम: मुरादगंज (औरिया, उत्तरप्रदेश) — यमुना में
  • राजस्थान में प्रवेश: चौरासीगढ़ (MP) किले के निकट, चित्तौड़गढ़
  • कुल लम्बाई: 1051 किमी (राजस्थान में 322 किमी)
  • प्रवाह क्षेत्र: चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर
  • सबसे लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा (राजस्थान-MP, 252 किमी)
  • कोटा-बूँदी एवं कोटा-सवाई माधोपुर की सीमा
  • प्रमुख जलप्रपात: चूलिया (भैंसरोड़गढ़, चित्तौड़गढ़) — 18 मीटर, राजस्थान का सबसे ऊँचा
  • चम्बल बेसिन: 12 जिलों में (सर्वाधिक: बारां > झालावाड़ > बूँदी)
  • सर्वाधिक अवनालिका अपरदन, उत्खात भूमि, बीहड़/डांग
  • गुंजाली नदी: चम्बल के राजस्थान में प्रवेश के बाद मिलने वाली प्रथम सहायक
  • बनास: चम्बल की सबसे लम्बी सहायक
  • हैंगिंग ब्रिज: चम्बल पर राज्य का प्रथम (1.40 किमी, 6 लेन, NH-27)
  • त्रिवेणी संगम: रामेश्वर घाट (पदरा गाँव, सवाई माधोपुर) — चम्बल, बनास, सीप
  • संरक्षित जीव: गांगेय सूंस डॉल्फिन (2009), घड़ियाल, उदबिलाव
  • सर्वाधिक V शेप गॉर्ज वैली: चम्बल नदी पर
चम्बल की सहायक नदियाँ
नदीउद्गमसंगमविशेष
गुंजालीचम्बल (राजस्थान में प्रवेश के बाद प्रथम)
छोटी कालीसिंधMPमाकेरिया गाँवदायीं ओर से प्रथम
कालीसिंधबागली गाँव (देवास, MP)नवसेरा (कोटा)राजस्थान में प्रवेश: बिन्दा गाँव (झालावाड़)
आलनियामुकुंदरा (कोटा)नोटना गाँव (कोटा)चन्द्रलोही नदी, कैथून शहर
पार्वतीसेहोर क्षेत्र (MP)पाल घाट (सवाई माधोपुर)करियाहट (बारां) से प्रवेश, किशनगंज शहर
सीपMPरामेश्वरम त्रिवेणी संगम
कुनशिवपुरी पठार (MP)मुरैना पठार के पासमुसेरी गाँव (बारां) से प्रवेश, शाहबाद शहर
बामनीहरिपुरा की पहाड़ियाँ (बेंगू, चित्तौड़गढ़)भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़)भैंसरोड़गढ़ दुर्ग चम्बल+बामनी संगम पर
ईजभैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़)डाबी (बूँदी)
कुरालऊपरमाल (भीलवाड़ा)बूँदी
मेजबिजौलिया (भीलवाड़ा)सीनपुर, लाखेरी (बूँदी)गुढ़ा बाँध, भीमतल जल प्रपात (मांगली नदी पर)
चाकणबूँदीकरमापुर (सवाई माधोपुर)चाकण बाँध (बूँदी)
चन्द्रभागासेमली (झालावाड़)खाड़िया (झालावाड़) — कालीसिंध मेंचंद्रभागा पशुमेला
परवनMPपलायता (बारां) — कालीसिंध मेंखरीबोर (झालावाड़) से प्रवेश, शेरगढ़ अभयारण्य, मनोहरथाना दुर्ग
आहूसुसनेर (MP)गागरोण (झालावाड़) — कालीसिंध मेंनन्दपुर (झालावाड़) से प्रवेश, मुकुन्दरा नेशनल पार्क, सामेला संगम
पीपलाजपंचपहाड़ (झालावाड़)चाखेली गाँव (झालावाड़) — कालीसिंध में
मांगलीभीमतल जल प्रपात (भीलवाड़ा)बूँदी — मेज नदी मेंमेज की सहायक, घोड़ा पछाड़ नदी
नेवज/निवाजराजगढ़ (MP)मवासा (झालावाड़) — परवन मेंकोलूखेडी (झालावाड़) से प्रवेश
काली खाड़झालावाड़झालावाड़ — परवन मेंमनोहरथाना दुर्ग के पास संगम
घोड़ा पछाड़बिजौलिया झीलबूँदी — मांगली में
चम्बल की बाँध परियोजनाएँ (3 चरण, 4 बाँध)
चरणबाँधस्थानविशेष
प्रथमगांधी सागरमन्दसौर (MP)चम्बल पर प्रथम, एकमात्र बाँध जो राजस्थान से बाहर
प्रथमकोटा बैराजकोटासिंचाई बाँध, 16 द्वार, बांगी नहर (178 किमी), दांगी नहर (248 किमी)
द्वितीयराणा प्रताप सागररावतभाटा (चित्तौड़गढ़)राजस्थान का सबसे बड़ा, विश्व का सबसे सस्ता (131 करोड़), सर्वाधिक भराव क्षमता
तृतीयजवाहर सागरबोरावास (कोटा)पिकअप बाँध, प्रथम बार हाइड्रो पम्प स्टोरेज

जल विद्युत: गांधी सागर 115 MW + राणा प्रताप सागर 172 MW + जवाहर सागर 99 MW = 386 MW (राजस्थान 50% + MP 50%)

चम्बल की लिप्ट नहरें
  • कोटा बैराज दायीं नहर से 8 लिप्ट: जालीपुरा, दीगोद (कोटा), अंता लिप्ट माईनर, अंता लिप्ट स्कीम, पचेल, कचारी, सोरखण्ड, गणेशगंज (बारां)
  • इंदिरा लिप्ट नहर: कसोड़ गाँव (करौली) — राजस्थान की सबसे ऊँची (125 मीटर)
  • पीपलदा लिप्ट स्कीम (सवाई माधोपुर) — प्रस्तावित
  • कालातीर परियोजना: धौलपुर

(2) बनास नदी

  • अन्य नाम: वशिष्टी, वन की आशा, वर्णाशा
  • उद्गम: वेरों का मठ (खमनीर पहाड़ियाँ, राजसमंद)
  • संगम: रामेश्वर घाट (सवाई माधोपुर) — चम्बल में
  • कुल लम्बाई: 512 किमी — पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे बड़ी नदी
  • दूसरे सर्वाधिक जल ग्रहण वाली नदी (47060 वर्ग किमी)
  • प्रवाहित जिले: राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर
  • बनास बेसिन: 17 जिलों में (सर्वाधिक: भीलवाड़ा > टोंक > जयपुर)
  • टोंक में सर्पाकार बहती है, टोंक को 2 भागों में बाँटती है
  • सर्वाधिक त्रिवेणी संगम: 1. रामेश्वर घाट (बनास, चम्बल, सीप), 2. राजमहल (बनास, डाई, खारी), 3. बीगोद (बनास, बेडच, मेनाल)
बनास की बाँध परियोजनाएँ
बाँधस्थिति
बीसलपुर बाँधदेवली (टोंक) — राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध, सबसे बड़ी पेयजल परियोजना
ईसरदा बाँधसवाई माधोपुर (ERCP का हिस्सा)
बाघेरी का नाका बाँधराजसमंद
मातृकुण्डिया बाँधचित्तौड़गढ़
नंदसमंद बाँधराजसमंद
बनास की सहायक नदियाँ
  • बायीं ओर से: कोठारी, खारी, डाई, मांशी, बांडी, मोरेल
  • दायीं ओर से: बेडच (सबसे लम्बी), मेनाल
  • बनास की सबसे लम्बी सहायक: खारी नदी
नदीउद्गमसंगमविशेष
कोठारीदिवेर की पहाड़ियाँ (राजसमंद)नन्दराय (भीलवाड़ा)मेजा बाँध, बागोर सभ्यता
खारीबीजराल पहाड़ियाँ (राजसमंद)राजमहल (टोंक)सबसे लम्बी सहायक, नारायण सागर बाँध (ब्यावर की जीवन रेखा)
मानसीकरणगढ़ (मांडलगढ़, भीलवाड़ा)फूलिया गाँव (भीलवाड़ा) — खारी मेंअडवान बाँध
मांशीसिलोरा पहाड़ियाँ (किशनगढ़, अजमेर)देवधाम (टोंक)सहोदरा नदी
डाईकिशनगढ़ पहाड़ियाँ (अजमेर)राजमहल (टोंक) — त्रिवेणी
सहोदराअराय गाँव की पहाड़ी (अजमेर)डुहिया गाँव (टोंक) — मांशी मेंटोरडीसागर बाँध
बांडीसामोद व आमलोद की पहाड़ियाँ (जयपुर)देवधाम (टोंक)3 बांडी नदियाँ हैं
मोरेलचेनपुरा की पहाड़ियाँ (जयपुर)खंडार (सवाई माधोपुर)मोरेल बाँध (दौसा), ढूंढ व कालीसिल नदी
मेनालमेनाल (भीलवाड़ा)बीगोद (भीलवाड़ा)
ढीलबावली (टोंक)सवाई माधोपुर — बनास में

(3) बेडच/आयड़ नदी

  • उद्गम: गोगुन्दा पहाड़ी (उदयपुर)
  • संगम: बीगोद (भीलवाड़ा) — बनास में
  • आयड़ के किनारे सभ्यता: आहड़ (उदयपुर)
  • बेडच के किनारे सभ्यता: बालाथल (उदयपुर), नगरी (चित्तौड़गढ़)
  • आयड़ नदी उदयसागर झील में गिरने के बाद बेडच कहलाती है
  • बनास में दायीं ओर से मिलने वाली सबसे लम्बी सहायक
  • प्रवाह: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा
  • सहायक: गम्भीरी नदी, औराई नदी
  • मदार बाँध (आयड़ पर, उदयपुर), घोसून्दा बाँध (बेडच पर, चित्तौड़गढ़)

(4) गम्भीरी नदी

  • उद्गम: जावद गाँव की पहाड़ियाँ (रतलाम, MP)
  • संगम: चित्तौड़गढ़ — बेडच में
  • निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) से राजस्थान में प्रवेश
  • केवल चित्तौड़गढ़ में बहती है
  • गम्भीरी + बेडच संगम पर चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित
  • गम्भीरी बाँध (निम्बाहेड़ा)
  • अन्य नाम: उटैगन (UP में), पार्वती (धौलपुर में)
  • उद्गम: नादौती की पहाड़ियाँ (स्पोटरा, करौली)
  • संगम: रीठई गाँव (आगरा, UP) — यमुना में
  • प्रवाह: करौली, भरतपुर — कुल लम्बाई: 288 किमी
  • भरतपुर-UP एवं धौलपुर-UP की सीमा
  • श्री महावीर जी मंदिर (करौली) इसके किनारे
  • सहायक: सेसा, पार्वती, खेर, जगर, भद्रावती, भैसावट, माची, अटा, बरखेड़ा
  • पाँचना बाँध (करौली): गम्भीर की 5 सहायक नदियों पर, अमेरिका के सहयोग से, राजस्थान का मिट्टी का सबसे बड़ा बाँध
  • अजान बाँध (भरतपुर): गंभीर व बाणगंगा के संगम पर

(5) पावती नदी

  • उद्गम: छावर पहाड़ियाँ (करौली)
  • संगम: खरगपुर (धौलपुर) — गम्भीर में
  • पावती बाँध (अगाई गाँव, धौलपुर)
  • राजस्थान में 2 पावती नदियाँ: 1. गम्भीर की सहायक (करौली, धौलपुर), 2. चम्बल की सहायक (कोटा, बारां)

(6) जगर नदी

  • उद्गम: डांग पहाड़ियाँ (करौली)
  • संगम: गम्भीर नदी में
  • जगर बाँध (करौली)

अलवर की प्रमुख नदियाँ

नदीउद्गमसंगमविशेष
सरसाथानागाजी (अलवर)बाणगंगा मेंसावा नदी, सहायक: सरवरी, भगाणी, तिलदह
भगाणीकांकनबाड़ी किले के पासमानसरोवर बाँध (अलवर)
अरवरीसकरा बाँध (थानागाजी, अलवर)सरसा नदी मेंतरुण भारत संघ द्वारा पुनर्जीवित

अंतः प्रवाह अपवाह तंत्र

(1) घग्घर नदी

  • कुल लम्बाई: 465 किमी (राजस्थान में 100 किमी) — आन्तरिक प्रवाह की सबसे लम्बी
  • उपनाम: प्राचीन सरस्वती, दृष्ट्वती, मृत नदी, सोतर, वाहिन्द, नट नदी, राजस्थान का शोक
  • उद्गम: कालका पहाड़ी (शिवालिक श्रेणी, शिमला, हिमाचल प्रदेश)
  • प्रवाह क्षेत्र: हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पाकिस्तान
  • राजस्थान में: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़
  • तलवाड़ा गाँव (टिब्बी, हनुमानगढ़) से राजस्थान में प्रवेश
  • राजस्थान की एकमात्र नदी जो उत्तर दिशा से प्रवेश करती है
  • अपवाह क्षेत्र: हनुमानगढ़ — नाली/पाट, पाकिस्तान — हकरा
  • प्राचीन सभ्यताएँ: कालीबंगा, पीलबंगा, रंगमहल (हनुमानगढ़)
  • तलवाड़ा झील: हनुमानगढ़ — राजस्थान की सबसे नीची झील (7 किमी)
  • हिमालय से राजस्थान में आने वाली एकमात्र नदी

(2) कांतली नदी

  • उद्गम: खण्डेला पहाड़ी (सीकर)
  • प्रवाह: सीकर, झुंझुनूं — लम्बाई: 100 किमी
  • पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली आंतरिक प्रवाह की सबसे लम्बी
  • झुंझुनूं को 2 भागों में बाँटती है
  • सहायक: साप, मावत
  • सभ्यताएँ: गणेश्वर (ताम्रयुगीन, नीम का थाना, सीकर), सुनारी (लौहयुगीन, खेतड़ी, झुंझुनूं)
  • अपवाह: तोरावाटी

(3) काकनी नदी

  • अन्य नाम: काकनेय, मसूरदी
  • उद्गम: कोटरी गाँव की पहाड़ी (जैसलमेर)
  • मीठा खाड़ी (जैसलमेर) में विलुप्त
  • राजस्थान में सर्वाधिक मार्ग बदलने वाली नदी
  • आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी (17 किमी)
  • बुझ झील (रूपसी गाँव, जैसलमेर) — मीठे पानी की झील

(4) साबी/साहिबी नदी

  • उद्गम: सेवर पहाड़ी (शाहपुरा, जयपुर)
  • पटौदी (हरियाणा) में विलुप्त
  • अपवाह: जयपुर, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा
  • सहायक: सोटा नदी
  • जोधपुरा सभ्यता (कोटपूतली-बहरोड) इसके किनारे
  • अकबर ने पुल बनाने का असफल प्रयास किया

(5) रूपारेल नदी

  • उद्गम: उदयनाथ पहाड़ी (थानागाजी, अलवर)
  • कुशलपुर गाँव (भरतपुर) में विलुप्त
  • उपनाम: लसवाड़ी नदी, वराह नदी
  • सीकरी बाँध (भरतपुर) — मोती झील को जलापूर्ति
  • मोती झील: भरतपुर की जीवनरेखा
  • सुजानगंगा नहर मोती झील से निकलती है — लोहागढ़ दुर्ग की खाई भरती है

(6) रूपनगढ़ नदी

  • उद्गम: किशनगढ़ (अजमेर)
  • संगम: सांभर झील (दक्षिण दिशा से)
  • प्रवाह: अजमेर, जयपुर
  • निम्बार्क पीठ (सलेमाबाद, अजमेर) इसके किनारे

(7) बाणगंगा

  • उपनाम: अर्जुन की गंगा, ताला नदी, रुण्डित नदी
  • उद्गम: बैराठ की पहाड़ी (कोटपूतली-बहरोड)
  • विलीन: भरतपुर के मैदान में
  • प्राचीन सभ्यता: बैराठ (कोटपूतली-बहरोड)
  • सहायक: गुमटीनाला, पालोसन, सूरी
  • प्रवाह: कोटपूतली-बहरोड, जयपुर, दौसा, भरतपुर
  • नहरें: उचेनी, पथेनी
  • लालपुर बाँध (भरतपुर), जमुवारामगढ़ (जयपुर) — ढूंढाड़ का पुष्कर
  • बाणगंगा बेसिन: 8 जिले (सर्वाधिक: भरतपुर > अलवर > दौसा)

(8) कुकुन्द नदी

  • उद्गम: मनोहरपुरा की पहाड़ी (जयपुर)
  • संगम: सांभर झील (उत्तर दिशा में)
  • प्रवाह: जयपुर, डीडवाना-कुचामन, पुनः जयपुर
  • 1897 में महाराजा रामसिंह (भरतपुर) ने बंध बारेठा बाँध बनवाया
  • बंध बारेठा अभयारण्य इसके किनारे

(9) मेथा नदी

  • उद्गम: मनोहरपुरा की पहाड़ी (जयपुर)
  • संगम: सांभर झील (उत्तर दिशा में)
  • प्रवाह: जयपुर, डीडवाना-कुचामन, पुनः जयपुर
  • प्रसिद्ध जैन तीर्थ लूणवां (कुचामन-डीडवाना) मेथा नदी के किनारे

(10) द्रव्यवती नदी

  • उद्गम: आधुनी कुण्ड (नाहरगढ़ पहाड़ी, जयपुर)
  • संगम: कानोता बाँध (जयपुर)
  • द्रव्यवती/अमानीशाह नदी परियोजना: गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के तर्ज पर रिवरफ्रन्ट
  • प्रोजेक्ट कंपनी: टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड
  • NGT ने प्रदूषण के कारण 100 करोड़ का जुमाना लगाया

राजस्थान की अन्य नदियाँ

  • रोहिनी नदी: जैसलमेर
  • नीमड़ा नदी: बाड़मेर (2006 कवास बाढ़)
  • बुझाड़ा व सीसारमा नदी: पिछोला झील में गिरती हैं

नदियों के किनारे सभ्यताएँ

सभ्यताजिलानदी
तिलवाड़ाबालोतरालूनी
गणेश्वरसीकरकांतली
सुनारीझुंझुनूंकांतली
बागोरभीलवाड़ाकोठारी
आहड़उदयपुरआयड़
बालाथलउदयपुरबेडच
नगरीचित्तौड़गढ़बेडच
कालीबंगाहनुमानगढ़घग्घर
रंगमहलहनुमानगढ़घग्घर
बैराठकोटपूतली-बहरोडबाणगंगा
जोधपुराकोटपूतली-बहरोडसाबी
गिलुण्डराजसमंदबनास
गरदड़ाबूँदीछाजा

नदियों के किनारे स्थित दुर्ग

दुर्गजिलानदी
भैंसरोड़गढ़चित्तौड़गढ़चम्बल व बामनी
कोटा दुर्गकोटाचम्बल
शेरगढ़ दुर्गधौलपुरचम्बल
चित्तौड़गढ़ दुर्गचित्तौड़गढ़बेडच व गम्भीरी
मनोहरथाना दुर्गझालावाड़परवन व कालीखाड़
शेरगढ़ दुर्गबारांपरवन
भटनेर दुर्गहनुमानगढ़घग्घर
गागरोण दुर्गझालावाड़कालीसिंध व आहु

अभयारण्यों से गुजरने वाली नदियाँ

अभयारण्यस्थाननदी
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियालजवाहर सागर से मुरादगंजचम्बल
जवाहर सागरकोटाचम्बल
शेरगढ़बारांपरवन
बस्सीचित्तौड़गढ़औराई व बामनी का उद्गम
भैंसरोड़गढ़चित्तौड़गढ़चम्बल व बामनी
केवलादेवभरतपुरबाणगंगा
दरा/मुकुन्दरा हिल्सकोटाआहु व कालीसिंध

अध्याय 8: राजस्थान की झीलें

झीलों के प्रकार

प्रकारपरिभाषाउदाहरण
बालसन झीलपहाड़ियों से घिरा अभिकेन्द्रीय अपवाह वाला विस्तृत समतल गर्तसांभर झील
प्लाया झीलेंमरूस्थलीय क्षेत्रों में चौरस सतह और अनप्रवाहित झोणी वाली खारे पानी की छोटी झीलेंडीडवाना झील
विवर्तनिका झीलपृथ्वी में होने वाली आंतरिक हलचलों के कारणनक्की झील
काल्डेरा/कोल्डिलेराज्वालामुखी से निकलने वाले लावा के प्रवाह सेपुष्कर झील

खारे पानी की झीलें

कारण: (1) टेथिस सागर का अवशेष, (2) दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ कच्छ की खाड़ी से सोडियम क्लोराइड के कण लाती हैं, (3) माइका शिष्ट चट्टानों से केशकर्षण पद्धति से नमक ऊपर आना।

ये झीलें मुख्यतः उत्तर पश्चिमी मरूस्थलीय भाग में पायी जाती हैं। खारे पानी की सर्वाधिक झीलें डीडवाना-कुचामन में।

सांभर झील

  • अन्य नाम: देवयानी झील, तीथर की नानी, कुष्ठ निवारक झील
  • विस्तार: जयपुर, डीडवाना-कुचामन, अजमेर — अपवाह क्षेत्र: 500 वर्ग किमी
  • भारत की खारे पानी की सबसे प्राचीन एवं तीसरी सबसे बड़ी झील (प्रथम: चिल्का, द्वितीय: पुलिकट)
  • भारत की अंतः प्रवाह की सबसे बड़ी झील
  • राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी झील (~500 वर्ग किमी)
  • आयताकार, लम्बाई: 32 किमी, चौड़ाई: 3-15 किमी
  • सर्वाधिक नमक लाने वाली नदी: मेथा नदी
  • नमक उत्पादन: भारत के कुल उत्पादन का 8.7%
  • नालीसर मस्जिद, शाकम्भरी माता मंदिर
  • बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) — वासुदेव चौहान ने निर्माण करवाया
  • अकबर का विवाह (6 फरवरी 1562, हरकाबाई/मर्यम उज्जमानी)
  • 1709 से 1949 तक मारवाड़ व जयपुर के मध्य 50-50% बंटी
  • 1869 में अंग्रेजों को लीज पर
  • सांभर साल्ट लिमिटेड (30 सितम्बर 1964) — केन्द्र 60% : राज्य 40%
  • साल्ट म्यूजियम (1870) — राजस्थान का एकमात्र
  • रामसर साइट (23 मार्च 1990)
  • राजस्थान की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी (नवम्बर 2019) — एवियन बोटुलिज्म

डीडवाना झील

  • डीडवाना-कुचामन जिले में, ~4 किमी लम्बाई
  • नमक खाने योग्य नहीं (सोडियम सल्फेट), स्थानीय लोग 'खाल्डा' कहते हैं
  • ब्राइट नमक: लवणीय पानी की क्यारियाँ बनाकर सुखाकर प्राप्त

पचपदरा झील

  • बालोतरा में, ~25 वर्ग किमी — राजस्थान की खारे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झील
  • पंचा नामक भील ने (400 वर्ष पूर्व) दलदल सुखाकर बनाया
  • सर्वोच्च कोटि एवं सबसे खारा नमक — 98% तक NaCl
  • कोशिया/कोशलू: कुएँ बनाकर नमक उत्पादन
  • राजस्थान स्टेट साल्ट वर्क्स (1960)
  • खारवाल जाति: मोरली झाड़ी की टहनी से वायु प्रवाह पद्धति — स्पेटिक नमक (रेस्तां)

राजस्थान की अन्य खारे पानी की झीलें

झीलजिलाविशेष
लूणकरणसरबीकानेरउत्तरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील
तालछापरचूरूकाले हिरणों के लिए प्रसिद्ध
रैवासासीकरकर्नल टॉड ने उल्लेख किया
कावोदजैसलमेर
बापफलौदीरेग्ता (वायु प्रवाह), क्यार (क्यारी बनाकर)
काछोरसीकर
पोकरणजैसलमेर
फलौदीफलौदी
बाड़ासरबाड़मेर
नावांडीडवाना-कुचामन
डेगानानागौर

मीठे पानी की झीलें

जयसमंद झील/ढेबर झील

  • स्थिति: सलूम्बर — ~55 वर्ग किमी
  • राजस्थान की मीठे पानी की झीलों में मानव निर्मित सबसे बड़ी
  • निर्माण: महाराजा जयसिंह (1685-1691 ई.)
  • जलापूर्ति: गोमती नदी (अन्य: झांवरी, बागर)
  • 7 टापू — सबसे बड़ा: बाबा का भाखड़ा/मगरा, सबसे छोटा: प्यारी
  • आइसलैंड रिसोर्ट: टापू पर होटल
  • श्यामपुरा व भाट नहरें: उदयपुर एवं सलूम्बर में सिंचाई
  • औदियाँ: 6 अवलोकन सम्भ
  • लसाड़िया पठार: पूर्व में कटा-फटा पठार
  • नमदेश्वर शिवालय, चित्रित हवामहल, रूठी रानी का महल, फतेह सिंह महल, राजकुमार के महल
  • राजस्थान के 26 अभयारण्यों में शामिल — 'जलचरों की बस्ती'

उदयपुर जिले की झीलें (झीलों की नगरी)

प्रमुख 5 झीलें: पिछोला, फतेहसागर, उदयसागर, स्वरूपसागर, जियान सागर/बड़ी झील

झीलनिर्माणविशेष
पिछोला1382-1421, राणा लाखा (छीतर/पिछू बंजारा द्वारा)सिसारमा व बुझाड़ा नदियों से जलापूर्ति, प्रथम सौर नाव एवं इलेक्ट्रिक नाव, जगमंदिर, जगनिवास (होटल ताज लेक पैलेस), बागोर की हवेली, नटनी का चबूतरा
फतेहसागर1688, महाराणा जयसिंहदेवाली तालाब/कनॉट बाँध, ड्यूक ऑफ कनॉट (1878), सहेलियों की बाड़ी, हवाला शिल्पग्राम, मोती महल, नीमच माता मंदिर, सौर वैधशाला (1976, डॉ. अरविंद भटनागर), सज्जनगढ़ किला, नेहरू आईलैंड उद्यान, मदार बाँध से जलापूर्ति
उदयसागर1559-1565, महाराणा उदयसिंहआयड़ नदी को रोककर, अकबर के दूत मानसिंह की भेंट
स्वरूपसागर1857, महाराजा स्वरूप सिंहपिछोला व फतेहसागर को जोड़ती है, टेलीस्कोप (बेल्लियम सहयोग)
जियान सागर/बड़ी झीलमहाराणा राजसिंह (माता ज्ञान कंवर की याद में)राजस्थान का प्रथम मत्स्य अभयारण्य, महासीर मछली, बाहुबली हिल्स

राजसमंद झील

  • एकमात्र झील जिसके नाम पर जिले का नामकरण
  • निर्माण: 1662-1676, महाराणा राजसिंह (अकाल राहत कार्यक्रम)
  • राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील (प्रथम: जयसमंद)
  • राज्य सरकार द्वारा पवित्र झील घोषित
  • आधारशिला: घेवर माता (दयालशाह की पत्नी)
  • जलापूर्ति: गोमती, ताल, केलवा नदियाँ
  • घेवर माता मंदिर, दयालशाह का महल/किला, नौ चौकी पाल (संगमरमर), महाराणा राजसिंह पेनोरमा
  • राजसिंह प्रशस्ति: काले संगमरमर पर संस्कृत का सबसे बड़ा शिलालेख (रचयिता: रणछोड़ भट्ट तैलंग)
  • द्वारिकाधीश मंदिर

गैब सागर झील — डूंगरपुर

  • उपनाम: एडवर्डसागर
  • निर्माण: महारावल गोपीनाथ
  • राजराजेश्वर शिवालय, काली बाई स्मारक (रास्तापाल हत्याकांड), बादल महल (महारावल पुंजराज), पुंजेला तालाब

किशोर सागर झील — कोटा

  • निर्माण: 1346, देहरा देह (बूँदी राजकुमार)
  • जगमंदिर महल मध्य में (राजस्थान में 2 जगमंदिर: पिछोला व किशोरसागर)

बूँदी जिले की झीलें

झीलविवरण
दुगारी/कनक सागरदुगारी गाँव में
नवल सागर/नवलखागढ़ पैलेस के पास
जैतसागरतारागढ़ किले के पास, जैता मीणा द्वारा निर्मित, सुख महल, रूडयार्ड किपलिंग
फूल सागरराव राजा भोज की पत्नी फूल लता द्वारा

रामगढ़ झील — बारां

  • उल्का पिंड से निर्मित, यूरेनियम और सारस क्रेन के लिए प्रसिद्ध
  • GSI द्वारा 12 नवम्बर 2016 को भू-पर्यटन स्थल घोषित
  • राजस्थान में 12 राष्ट्रीय भू समारक

भरतपुर जिले की झीलें

झीलविवरण
मोती झीलमहाराजा सूरजमल, भरतपुर की जीवन रेखा, रूपारेल नदी, सुजानगंगा नहर, कारागिल उद्यान पार्क
झील का बारांबयाना (भरतपुर)
सुजानगंगा झीलवास्तव में नहर, महाराजा सूरजमल, लोहागढ़ दुर्ग की खाई

धौलपुर जिले की झीलें

  • तालाब शाही झील: सलेह खाँ (जहाँगीर का मनसबदार), 1617 ई.
  • रामसागर झील: रामसागर अभयारण्य

सिलीसेढ़ झील — अलवर

  • राजस्थान का नन्दनकानन
  • महाराजा विनयसिंह (पत्नी शीला की याद में), 1845 में 6 मंजिला शाही महल, RTDC होटल लेक पैलेस
  • भर्तृहरि का मंदिर व गुफा (नाथपंथियों का तीर्थ)

मानसरोवर झील — झालावाड़

  • रातेड़ी (झालावाड़), काड़ला झील भी कहा जाता है

जयपुर जिले की झीलें

झीलनिर्माणविशेष
मानसागरमानसिंह प्रथम (1610), गर्भावती नदी परजलमहल (सवाई जयसिंह), नाहरगढ़ पहाड़ी
मावठाप्राकृतिकआमेर किले के पास

शेखावटी की झीलें

  • पन्नालालशाह का तालाब: खेतड़ी-झुंझुनूं (स्वामी विवेकानन्द)
  • पीथमपूरी झील: सीकर

अजमेर जिले की झीलें

पुष्कर, आनासागर, बीसलसागर, फॉयसागर

झीलविवरण
पुष्करकाल्डेरा झील, हिन्दुओं का पाँचवा तीर्थ, तीर्थों का मामा, 52 घाट, अर्द्धचन्द्राकार, राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील, सबसे प्राचीन एवं सबसे प्रदूषित, नाहर राव परिहार, जनाना घाट/क्वीन मेरी घाट/गांधी घाट (1911), पुष्कर मेला (कार्तिक पूर्णिमा, रंगीला मेला), ब्रह्मा मंदिर, वराह मंदिर, सावित्री मंदिर (रोप-वे), गायत्री मंदिर, जहाँगीर के महल
बीसलसरबीसलदेव (1152-1162), दो टापुओं पर राजप्रसाद, जहाँगीर के महल (वर्तमान चर्च)
आनासागरअणोराज/आनाजी (1135-1137), चन्द्रा व बांडी नदी, दौलतबाग (सुभाष उद्यान), गुलाब इत्र (नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम), बारहदरी (शाहजहाँ), चश्मा-ए-नूर
फॉयसागर/वरुण सागर1891-92, इंजिनियर फॉय, बांडी नदी, राजस्थान की दूसरी अकाल राहत में बनी

नक्की झील

  • माउंट आबू (सिरोही) — राजस्थान की सबसे ऊँची झील (1200 मी.)
  • राजस्थान की सबसे गहरी (35 मीटर) एवं एकमात्र जमने वाली झील
  • विवर्तनिका झील का उदाहरण
  • गरासिया जनजाति की पवित्र झील
  • एकमात्र हिल स्टेशन वाली झील, सनसेट पॉइंट प्रसिद्ध
  • चट्टानें: नन्दी रॉक, टॉड रॉक, नन रॉक
  • रामकुण्ड, रघुनाथ मंदिर, रामझरोखा, हाथी गुफा, चम्पा गुफा, विवेकानन्द गुफा

जोधपुर जिले की झीलें

झीलविवरण
बालसमंद1159 ई., प्रतिहार शासक बालक राज, मंडोर, पेयजल आपूर्ति, आठ-खम्भा महल (महाराजा सुरसिंह), जनाना बाग, गुलाब सागर का पानी
कायलाना/प्रताप सागर/तख्त सागरप्राकृतिक, 1872 ई. सर प्रताप, आधुनिक जोधपुर का निर्माता, देश का प्रथम वनस्पतिक उद्यान माचिया जैविक उद्यान, राजीव गांधी लिप्ट कैनाल से इंदिरा गांधी नहर का पानी
उम्मेद सागर1930-1933, महाराजा उम्मेद सिंह
गुलाब सागर1788, विजयसिंह की पासवान गुलाबराय

जैसलमेर जिले की झीलें

  • अमरसागर: महारावल अमरसिंह (1688), रूपसी गाँव
  • बुझ झील: काकनी/मसूरदी का पानी, राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र
  • घड़सीसर: महारावल घड़सिंह, जैसलमेर दुर्ग के पूर्वी प्रवेश द्वार के पास, टीलों की पोल, गजमंदिर/गजरूपेश्वर शिवालय, जैसलमेर लोक संस्कृति संग्रहालय
  • रामदेवरा झील/रामसरोवर

बीकानेर जिले की झीलें

झीलविवरण
कोलायतशुष्क मरूस्थल का सुन्दर उद्यान, कपिल मुनि का आश्रम, 52 घाट, कार्तिक पूर्णिमा मेला (जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा), चारण जाति दर्शन नहीं करती (करणी माता का पुत्र लखन डूबा था)
गजनेर1920, महाराजा गंगासिंह (गंगा सरोवर), पानी का शुद्ध दर्पण, गजनेर महल

महत्वपूर्ण तथ्य

शब्दअर्थ
जयपुर की जीवन रेखाअमानीशाह नाला (द्रव्यवती नदी)
राजसमंद की जीवन रेखानंदसमंद झील
भरतपुर की जीवन रेखामोती झील
ब्यावर की जीवन रेखानारायण सागर बाँध
राजस्थान की जीवन रेखाइंदिरा गाँधी नहर
बीकानेर की जीवन रेखालूणकरणसर लिप्ट नहर
जोधपुर की जीवन रेखाराजीव गाँधी लिप्ट नहर
गंगानगर की जीवन रेखागंगनहर
मारवाड़ की जीवन रेखालूणी नहर

अध्याय 9: राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ

राजस्थान सिंचाई विभाग: 14 दिसम्बर, 1949
प्रथम सिंचाई परियोजना: गंगनहर परियोजना
सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना: IGNP
सर्वाधिक सिंचित जिला: गंगानगर
सर्वाधिक सिंचाई परियोजना वाला जिला: झालावाड़
सबसे बड़ी पेयजल परियोजना: बीसलपुर बाँध परियोजना

सिंचाई के प्रमुख साधन

साधनप्रतिशतसर्वाधिक
कुएँ एवं नलकूप69.39%जयपुर
नहरें~28.39%श्रीगंगानगर
तालाब~0.33%भीलवाड़ा

व्यास बहुउद्देशीय परियोजना

  • व्यास नदी पर — पंजाब, हरियाणा, राजस्थान की संयुक्त
  • राजस्थान को कुल विद्युत: 428 MW (198 देहर + 230 पोंग)
  • पंडोह बांध (मंडी, हिमाचल): 990 MW, राजस्थान 20% = 198 MW
  • पोंग बांध (कांगड़ा, हिमाचल): 390 MW, राजस्थान 59% = 230 MW
  • राजीव गांधी लौंगेवाला समझौता (1985)
  • ईराडी आयोग (1986): राजस्थान का हिस्सा 8.6 मिलियन एकड़ फीट

भाखड़ा-नांगल परियोजना

  • सतलज नदी पर — भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय
  • राजस्थान की हिस्सेदारी: 15.2%
  • सर्वाधिक सिंचाई: हनुमानगढ़
  • भाखड़ा बांध (1962): बिलासपुर (HP), भारत का सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बाँध (226 मी.)
  • नांगल बांध (1952): रोपड़ (पंजाब), बिस्त दोआब नहर, भाखड़ा नहर
  • विद्युत: 1532.73 MW कुल, राजस्थान 233 MW
  • सिंचाई: 14.6 लाख हेक्टेयर, राजस्थान 2.3 लाख हेक्टेयर

राजीव गांधी सिद्धमुख नहर परियोजना

  • शिलान्यास: 1989, राजीव गांधी
  • आर्थिक सहयोग: यूरोपियन आर्थिक समुदाय, नाबार्ड
  • नदियाँ: रावी व व्यास का अतिरिक्त जल
  • लाभान्वित: हनुमानगढ़, नोहर, सिद्धमुख, तारानगर, साहवा (चूरू)

चम्बल नदी घाटी परियोजना

  • राजस्थान + मध्यप्रदेश (50:50)
  • विद्युत: 386 MW (राजस्थान 193 MW, MP 193 MW)
  • सिंचित भूमि: 4.50 लाख हेक्टेयर
  • 1953 में शुरू, 3 चरण, 4 बाँध

माही बहुउद्देशीय परियोजना

  • राजस्थान (45%) + गुजरात (55%)
  • लाभान्वित: बाँसवाड़ा, डूंगरपुर
  • माही बजाज सागर बाँध (बोरखेड़ा, बाँसवाड़ा): राजस्थान का सबसे लंबा (3109 मी.)
  • 2 विद्युत गृह: लीलवाना (50 MW), हेगपुरा (90 MW) = 140 MW
  • राजस्थान 100% विद्युत प्राप्त करता है
  • कडाना बाँध (रामपुर, गुजरात) — संपूर्ण लाभ गुजरात
  • कागदी पिकअप बाँध (बाँसवाड़ा): बायीं नहर (आनन्दपूर भूकिया, 26 किमी), दायीं नहर (भीखा भाई-सागवाड़ा, 125 किमी)

गंगनहर

  • नदी: सतलज
  • शुरुआत: हुसैनीवाला (पंजाब)
  • 1920 में समझौता (बीकानेर, पंजाब, बहावलपुर)
  • 1921 में नींव, 1927 में उद्घाटन (लॉर्ड इर्विन)
  • निर्माणकर्ता: महाराजा गंगा सिंह — राजस्थान का भागीरथ
  • लाभान्वित: गंगानगर
  • कुल लम्बाई: 129 किमी (112 पंजाब, 17 राजस्थान)
  • 4 लिप्ट नहरें: करणी, लालगढ़, समीजा, लक्ष्मीनारायण
  • राजस्थान की सबसे पुरानी नहर, विश्व की प्रथम पक्की नहर (तल सीमेंटेड)
  • राजस्थान की प्रथम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना

गुड़गाँव नहर

  • वर्तमान नाम: पश्चिमी यमुना लिंक नहर
  • उद्गम: ओखला हेड (दिल्ली), यमुना नदी
  • राजस्थान व हरियाणा
  • राज्य में कुल लम्बाई: 53 किमी
  • भरतपुर (वर्तमान डीग) में सिंचाई

भरतपुर नहर

  • उद्गम: आगरा नहर (यमुना)
  • राजस्थान व उत्तरप्रदेश
  • लाभान्वित: भरतपुर (वर्तमान डीग)
  • कुल लम्बाई: 28 किमी (राजस्थान 12 किमी, UP 16 किमी)

रामजल सेतु लिंक परियोजना (PKC-ERCP)

📌 नवीनतम अपडेट: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 22 जनवरी 2025 को पार्वती-कालीसिंध-चम्बल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP) का नाम परिवर्तित कर 'रामजल सेतु लिंक परियोजना' कर दिया है। 'रा' = राजस्थान, 'म' = मध्यप्रदेश।
  • 17 दिसम्बर 2024 को दादिया गांव, जयपुर में राज्यस्तरीय समारोह (मुख्य अतिथि: PM नरेन्द्र मोदी)
  • लाभान्वित जिले: राजस्थान के 17 + MP के 13
  • कुल सिंचाई क्षेत्र: 4.03 लाख हेक्टेयर (राजस्थान 2.51 + MP 1.52)
  • MOU के तहत पूर्व: 5.80 लाख हेक्टेयर (राजस्थान 2.80 + MP 3.00)
  • ~25 लाख किसान परिवारों को लाभ, 17 जिलों की ~40% आबादी (3.25 करोड़) को पेयजल
  • कुल लम्बाई: 1800 किमी (राजस्थान 1200 + MP 600)
  • कुल अनुमानित लागत: 70 हजार करोड़
  • वित्तीय: केन्द्र 90%, राज्य (MP + RJ) 5-5%
  • जल आवंटन: राजस्थान 4103 MCM, MP ~3000 MCM
  • राजस्थान में 158 बांध भरेंगे
  • 28 जनवरी 2024: त्रिपक्षीय MOU
  • 5 बैराज + 2 बांध: रामगढ़ बैराज (कूल नदी, किशनगंज, बारां), महलपुर बैराज (पार्वती, मांगरोल, बारां), नवनेरा बैराज (कालीसिंध, दीगोद, कोटा), मेज बैराज (मेज नदी, इन्द्रगढ़, बूँदी), नीमोद राठौड़ बैराज (बनास, चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर), डूंगरी बांध (बनास, सवाई माधोपुर), ईसरदा बांध (बनास, सवाई माधोपुर)
  • नवनेरा बैराज का लोकार्पण: 17 दिसम्बर 2024, PM नरेन्द्र मोदी, 1069 करोड़, सर्वाधिक भराव क्षमता

इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)

  • पुराना नाम: राजस्थान नहर (1984 में IGNP)
  • उपनाम: पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा, राजस्थान की मरूगंगा (गोविन्द वल्लभ पंत)
  • शुरुआत: हिरके बैराज (फिरोजपुर, पंजाब) — सतलज-व्यास नदी संगम
  • राजस्थान की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना
  • आर्थिक सहयोग: विश्व बैंक
  • सुझाव: 1948, इंजीनियर कैंवरसेन (बीकानेर)
  • नींव: 31 मार्च 1958 — गोविन्द वल्लभ पंत
  • प्रथम जल प्रवाह: 1961, नौरंगदेसर वितरिका — डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
  • IGNP बोर्ड: 1958, जयपुर
  • जीरो प्वाइंट: मोहनगढ़ (जैसलमेर)
  • पूर्ण होने पर सिंचित क्षेत्र: 19.65 लाख हेक्टेयर
  • वर्तमान सिंचित क्षेत्र: 16.17 लाख हेक्टेयर
  • कुल लम्बाई: 649 किमी (फीडर 204 + मुख्य नहर 445)
  • राजस्थान में कुल लम्बाई: 445 + 35 = 480 किमी
  • प्रस्तावित नहर सहित कुल: 204+445+165 = 814 किमी
  • 2 चरण: प्रथम (393 किमी, हिरके से पूगल), द्वितीय (256 किमी, पूगल से मोहनगढ़)

IGNP की 9 शाखाएँ

क्र.शाखालाभान्वित जिले
1रावतसर (बायीं)हनुमानगढ़
2सूरतगढ़गंगानगर
3अनूपगढ़गंगानगर, बीकानेर
4पूगलबीकानेर
5दातौरबीकानेर
6बीरसलपुरबीकानेर
7चारणवालाबीकानेर, फलौदी, जैसलमेर
8शहीद बीरबलजैसलमेर
9सागरमल गोपाजैसलमेर

2 उपशाखाएँ: लीलवा, दीघा

IGNP की 7 लिप्ट नहरें

क्र.नामलाभान्वित
1चौधरी कुम्भाराम (गंधेली-नोहर-साहवा)हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं — सर्वाधिक जिले
2कैवरसेन (लूणकरणसर)बीकानेर, गंगानगर — बीकानेर की जीवनरेखा
3पन्नालाल बारूपाल (गजनेर)बीकानेर, नागौर
4तेजाजी (बाँगड़सर)बीकानेर — सबसे छोटी
5डॉ. करणी सिंह (कोलायत)बीकानेर, फलौदी
6गुरु जम्भेश्वर (फलौदी)बीकानेर, फलौदी
7जयनारायण व्यास (पोकरण)जैसलमेर, फलौदी — एकमात्र जो बीकानेर में नहीं

नर्मदा नहर परियोजना

  • राजस्थान एवं गुजरात की संयुक्त
  • कुल लम्बाई: 532 किमी, राजस्थान में 74 किमी (जालौर 65 + बाड़मेर 9)
  • लाभान्वित: जालौर, बाड़मेर — सर्वाधिक: जालौर
  • सिलू गांव (जालौर) से प्रवेश
  • 3 लिप्ट नहरें: पनेरिया, भादरेड़ा, सांचौर
  • भारत की पहली बड़ी सिंचाई परियोजना जिसमें स्प्रिंकलर व बूँद-बूँद सिंचाई अनिवार्य

राजस्थान की प्रमुख 8 वृहद सिंचाई परियोजनाएं

  1. नर्मदा नहर परियोजना
  2. परवन वृहद् परियोजना (झालावाड़) — 7,355.23 करोड़
  3. धौलपुर लिप्ट परियोजना — 39,980 हेक्टेयर, 30 MW सौर ऊर्जा
  4. RWSRPD (मरू क्षेत्र जल पुनर्गठन) — NDB 70% ऋण, 10 जिले
  5. नवनेरा बैराज (ERCP) — कालीसिंध, 1410 मी. लम्बाई
  6. अपर हाई लेवल केनाल (माही) — 338 गाँव, 41,903 हेक्टेयर
  7. पीपलखूट हाई लेवल केनाल (प्रतापगढ़) — 5,000 हेक्टेयर
  8. कालीतीर लिप्ट परियोजना (धौलपुर) — 483 गाँव, 98.60 MCM

अध्याय 10: भू-जल

  • भू-जल विभाग कार्य: नलकूपों की सरंचना, पेयजल, रॉक ड्रिलिंग, विस्फोटन
  • भू-जल आंकलन रिपोर्ट 2021: राज्य का 78% क्षेत्र अति-दोहित श्रेणी में
  • कुल भू-जल दोहन दर: 150%
  • वर्ष 2023-24: 160 नलकूप, 289 हैंडपंप बोरवेल, 7 विज्ञों मीटर स्थापित
  • राजस्थान की नवीनतम भू-जल नीति: 18 फरवरी 2010
  • विश्व जल दिवस: 22 मार्च, राष्ट्रीय जल दिवस: 14 अप्रैल

राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना

  • 2016-17 से 2023-24, 8 वर्ष
  • सहयोग: विश्व बैंक (100% भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित)
  • राजस्थान का प्रथम बाँध जिसमें स्काडा: बीसलपुर बाँध (टोंक)

भू-जल संसाधनों का आकलन

  • सतही जल: 1.16%, भू-जल: 1.72%
  • चंबल और माही बेसिन में पर्याप्त वर्षा व जल
  • वर्ष 2022: 302 ब्लॉक (7 शहरी ब्लॉक सहित)
  • लवणीय जोन (3): तारानगर (चूरू), खाजुवाला (बीकानेर), रावतसर (हनुमानगढ़)

अटल भू-जल योजना

  • भारत सरकार एवं विश्व बैंक (50:50), 1 अप्रैल 2020
  • 16 जिलों के 38 पंचायत समितियों के 1,129 ग्राम पंचायतों में

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0

  • प्रथम चरण: 27 जनवरी 2016, गंधेड़ी (झालावाड़)
  • द्वितीय चरण: देवरी (झालावाड़)
  • 5,000 से 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर जल संग्रहण
  • 5,135 गाँवों में ~1.50 लाख कार्य, ₹3,500 करोड़

अन्य योजनाएँ

योजनाविवरण
PM कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड 2.0)2021-22 व 2022-23, 1,858.86 करोड़, 7.51 लाख हेक्टेयर, 149 परियोजनाएँ
नीरांचल योजना2016-17, ग्रामीण विकास मंत्रालय, 9 राज्य, 18 जिले (राजस्थान: जोधपुर, उदयपुर)
जीवन धारा योजना1996-97, विश्व बैंक, BPL ST/SC लघु किसानों को 100% अनुदान
राजीव गांधी जल संचय योजना20 अगस्त 2019, प्रथम चरण 33 जिले 295 पंचायत समिति 3931 गाँव; द्वितीय चरण 1 सितम्बर 2022
रिपेयर-रिनोवेशन रिस्टोरेशन2005, PMKSY में 2017-18, 60:40, 37 परियोजनाएँ
राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधारJICA, अप्रैल 2019, 137 सिंचाई परियोजनाएँ, 4.70 लाख हेक्टेयर
बाँध पुनर्वास और सुधारविश्व बैंक + AIIB, 70:30, 212 बड़े बाँध

अध्याय 11: राजस्थान जल संरक्षण एवं जल प्रबन्धन

परम्परागत जल स्रोत

  1. तालाब: वर्षा जल संग्रहण, धार्मिक तालाबों की सुरक्षा
  2. झील: राजस्थान में सर्वाधिक परम्परागत जल संरक्षण
  3. नाडी: भूसतह पर गड्ढा, 1520 ई. में राव जोधाजी द्वारा प्रथम, पश्चिमी राजस्थान में 3-12 मीटर गहरी, 10 महीने पानी
  4. टांका/कुण्ड: रेतीले क्षेत्र में वर्षा जल संग्रहण, पेयजल हेतु
  5. टोबा: नाडी से अधिक गहरा, ~20 परिवार
  6. बावड़ी: सीढ़ीदार कुआँ, अपराजितपृच्छा में 4 प्रकार (नंदा, भद्रा, जया, सर्वतोमुख)
  7. खड़ीन: 15वीं शताब्दी, जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मण, 500+ खड़ीनें, 1300 हेक्टेयर
  8. झालरा: ऊँचे तालाबों के रिसाव से, जोधपुर के प्रमुख झालरे
  9. कुई/बेरी: तालाब के पास, 10-12 मीटर गहरी
  10. रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग: छतों का पानी संग्रहण

प्रमुख बावड़ियाँ

बावड़ीस्थानविवरण
चाँद बावड़ीआभानेरी (दौसा)8वीं सदी, प्रतिहार राजा चाँद, 19.5 मी. गहरी, 13 मंजिली, 3506 सीढ़ियाँ, राजस्थान की सबसे गहरी व कलात्मक
पन्ना मीणा की बावड़ीजयपुरजयगढ़ दुर्ग के पास, 29 दिसम्बर 2017 को डाक टिकट
रानी जी की बावड़ीबूँदी1699 ई., रानी लाड़ कंवर नाथावत, 29 दिसम्बर 2017 डाक टिकट
नीलखा बावड़ीडूंगरपुर1856, आसकरण की चौहान रानी प्रेमल दे, शिल्पी लीलाधर
त्रिमुखी बावड़ीदेवारी (उदयपुर)महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे
नागर-सागर कुण्डबूँदी1821, रानी चन्द्रभान कुंवरी, 29 दिसम्बर 2017 डाक टिकट

वर्षा जल संरक्षण शब्दावली

शब्दअर्थ
आगौर (पायतान)वर्षा जल को नाडी/तालाब में उतारने के लिए चारों ओर मिट्टी दबाकर बनाया गया
टांकावर्षा जल एकत्रित करने का हौद
नाडीछोटी तलैया
नेहटा (नेष्टा)अतिरिक्त जल की निकासी
पालर पाणीनाडी/टांके में जमा वर्षा जल
बेरीछोटा कुआँ (पश्चिमी राजस्थान)
मदारजल आने की धरती की सीमा
चौतीना/चौलानाचार चड़सों द्वारा पानी खींचने पर भी न टूटने वाला कुआँ
परस/हाथकुएँ की गहराई माप
ताकियातालाब का ऊँचा स्थान

प्रमुख जल संसाधन योजनाएँ

योजनाविवरण
राजस्थान ग्रामीण जलप्रदाय एवं फ्लोरोसिस निराकरण2013, JICA, नागौर के 968 ग्राम, 7 कस्बे
राजस्थान फ्लोरोसिस नियंत्रणयूनीसेफ, 30 जिलों में
राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधारJICA 85% + राज्य 15%, 27 जिले, 137 परियोजनाएँ
राजस्थान मरू क्षेत्र जल पुनर्गठनNDB, 10 जिले, IGNP जीर्णोद्धार
जलशक्ति अभियान1 जुलाई 2019, 29 जिले, अजमेर प्रथम
जल जीवन मिशन15 अगस्त 2019, 2024 तक हर घर नल, माण्डल (भीलवाड़ा) राज्य का पहला 100% ब्लॉक
राजस्थान नदी बेसिन व जल संसाधन8 अप्रैल 2015, नदियों को जोड़ने का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य
मुख्यमंत्री राजनीय योजना13 मार्च 2020, निःशुल्क पेयजल
जलमणि योजना100% केन्द्र, 300 से कम छात्रों वाले ग्रामीण स्कूलों में RO
मिशन अमृत सरोवर24 अप्रैल 2022, हर जिले में 75 अमृत सरोवर
जनता जल योजना31 जिले (जैसलमेर, बीकानेर छोड़कर)
जल जन अभियान16 फरवरी 2023, PM नरेन्द्र मोदी, आबू रोड, ब्रह्मकुमारी + जल शक्ति मंत्रालय
🔹 विशेषज्ञ जोड़: बावड़ियों का शहर — बूँदी; सर्वाधिक बावड़ियाँ — जोधपुर, जालौर; बावड़ियों की स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध — शेखावाटी, बूँदी। 29 दिसम्बर 2017 को राजस्थान की 6 बावड़ियों पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया।

अध्याय 12: राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति

वन नीति

  • प्रथम राष्ट्रीय वन नीति: 1952 (33% भू-भाग)
  • द्वितीय राष्ट्रीय वन नीति: दिसम्बर 1988 (मैदानी 20%, पहाड़ी 60%)
  • राजस्थान वन एवं पर्यावरण नीति: 18 फरवरी 2010 (20% लक्ष्य, देश का प्रथम राज्य)
  • राजस्थान वन विभाग: 1949
  • नवीनतम वन नीति: 5 जून 2023 (20% वनस्पति आवरण, 20 वर्ष)

वन रिपोर्ट 2023 (18वीं)

श्रेणीक्षेत्रफल (वर्ग किमी)प्रतिशत
वनावरण16,548.214.84%
वृक्षावरण10,841.123.16%
कुल27,389.338%
अभिलेखित वन32,8699.60%
  • जारी: 21 दिसम्बर 2024, FSI देहरादून
  • भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI): 1981, मुख्यालय देहरादून
  • वनावरण में 83.80 वर्ग किमी की कमी, वृक्षावरण में 478.26 वर्ग किमी की वृद्धि
  • कुल वृद्धि: 394.26 वर्ग किमी (देश में चौथा स्थान)
  • अधिकतम वृद्धि वाले राज्य: छत्तीसगढ़ (684), उत्तरप्रदेश (559), ओडिशा (559), राजस्थान (394)

घनत्व के आधार पर वर्गीकरण

प्रकारकेनोपी घनत्वक्षेत्रफल (वर्ग किमी)प्रतिशतसर्वाधिक जिले
अत्यधिक सघन (VDF)70%+223.200.07%अलवर, उदयपुर
मध्यम सघन (MDF)40-70%4237.411.24%उदयपुर, प्रतापगढ़
खुले वन (OF)10-40%12087.603.53%उदयपुर, बारां

प्रशासनिक वर्गीकरण

प्रकारप्रतिशतक्षेत्रफलसर्वाधिक
आरक्षित वन37.04%12,176 वर्ग किमीउदयपुर
रक्षित/सुरक्षित वन56.56%18,588 वर्ग किमीबारां
अवर्गीकृत वन6.40%2,105 वर्ग किमीबीकानेर

भौगोलिक वर्गीकरण

प्रकारक्षेत्रवर्षाविस्तारवृक्ष
उपोष्ण कटिबंधीय सदावहार1%150 सेमीमाउंट आबूडिकिल्पटेरा आबूएसिस, जामुन, बांस
उष्ण कटिबंधीय सागवान7%75-110 सेमीडूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़गुलर, महुआ, तेंदू, सागवान
उष्ण कटिबंधीय मानसूनी पतझड़28.38%50-80 सेमीउदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुरसाल, सागवान, शीशम
उष्ण कटिबंधीय धोकड़ा58%30-60 सेमीअर्द्ध शुष्क मरूस्थलीय जिलेखेजड़ी, रोहिड़ा, कैर, बैर, बबूल
उष्ण कटिबंधीय मरूस्थलीय कंटीले6.26%0-30 सेमीशुष्क मरूस्थलीय जिलेनागफनी, कैक्टस

प्रमुख वनस्पतियाँ

वनस्पतिवैज्ञानिक नामविशेष
खेजड़ीप्रोसोपिस सिनेरेरियाराज्य वृक्ष (31 अक्टूबर 1983), पौराणिक: शमी, स्थानीय: जांटी, तिमल: पेयमेय, कन्नड़: बज्जी, सिंधी: धोकड़ो, सर्वाधिक: जोधपुर, खेजड़ली गाँव (1730, अमृता देवी, 363 बलिदान), चिपको आंदोलन (1974), खेजड़ी दिवस: 12 सितम्बर, ऑपरेशन खेजड़ा (1991)
रोहिड़ाटेकोमेला एण्डलेटाराज्य पुष्प (31 अक्टूबर 1983), सर्वाधिक: जोधपुर, मारवाड़ टीक/रेगिस्तान सागवान, मरु शोभा
पलाश/ढाकब्युटिया मोनोस्पर्मासर्वाधिक: राजसमंद, अजमेर, अलवर, वन/जंगल की आग/The Flame of Forest
खैरअकेशिया/सेनेगलिया कैटेचूसर्वाधिक: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कत्था (कथौड़ी जनजाति)
महुआमधुका लॉगिफोलियासर्वाधिक: डूंगरपुर, आदिवासियों का कल्पवृक्ष, मोकड़ी (महूड़ी) शराब, डोरमा तेल
तेंदूडाइपाइरस मैलेनोजाइलोनसर्वाधिक: प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, हाड़ौती, 1976 राष्ट्रीयकरण, फल: टिमरू, वागड़ का चौक, बीड़ी उद्योग

प्रमुख घास मैदान

घासविशेष
बांसविश्व की सबसे लम्बी घास, आदिवासियों का हरा सोना, सर्वाधिक: बाँसवाड़ा, उदयपुर, सलूम्बर, चित्तौड़, कोटा, राष्ट्रीय बांस मिशन (2006-07), राष्ट्रीय कृषि वानिकी एवं बांस मिशन (2015-16)
सेवणलेज्यूरस सिंडिकस, स्थानीय: लीलोण, लाठी सीरीज, घासों का राजा, गोडावण की शरणस्थली, सर्वाधिक: जैसलमेर
खसभरतपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, इत्र
बूरबीकानेर, सबसे सुगंधित
पामरोजा/पामरोशासुगंधित, इत्र
सुगनीजैसलमेर, दवा निर्माण
मोचियातालछापर (चूरू)

अध्याय 13: राजस्थान की मृदा

मृदा के प्रकार

क्र.मृदाविस्तारविशेष
1जलोढ़ मृदाअलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, दौसा, टोंकदोमट/कांप/कछारी, पोटाश अधिक, फास्फोरस व नाइट्रोजन कम, सर्वाधिक उपजाऊ
2काली मृदाहाड़ौती पठार (कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़)बेसाल्ट लावा, रेगुर/कपास/ज्वालामुखी, लोहा, चूना, कैल्सियम, मैग्नीशियम, कपास
3रेतीली/बलुई मृदापश्चिमी राजस्थान (बीकानेर, जैसलमेर, फलौदी, जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा)ग्रेनाइट चट्टानों का अपरदन, बालू रेत, एन्टीसोल, मरूस्थलीय, सर्वाधिक विस्तार, नाइट्रोजन व ह्यूमस कम
4पर्वतीय/वनीय (लिथोसॉल्स)अरावली क्षेत्रह्यूमिक अम्ल, जीवांश, मक्का
5भूरी-रेतीली (सिरोजेम/ग्रे-पेण्टेड)अर्द्ध शुष्क प्रदेश (बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, पाली, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं)मरूस्थलीय मिट्टी, फास्फेट कम, ज्वार, बाजरा, मूंग, मोठ
6लाल लोमी/लेटराइटउदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर (माही नदी अपवाह)कायान्तरित चट्टानों का अपरदन, लाल रंग लौह अंश, मक्का, कपास, अफीम
7लाल-काली मृदाभीलवाड़ा, बूँदी, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ामालवा की काली मृदा का विस्तार, मक्का, चावल, गन्ना
8लवणीय मृदाबीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर (IGNP + नर्मदा नहर)रेह, खार, कल्लर, NaCl अधिक, गन्ना, अनार, ग्वार, जौ
9लाल-पीली मृदाबनास बेसिन (सवाई माधोपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, राजसमंद)ग्रेनाइट/नाइस चट्टानों का अपक्षरण, मोटा अनाज, मूंगफली, कपास

USDA द्वारा वैज्ञानिक वर्गीकरण

क्र.मृदाविस्तारविशेष
1एरिडोसेलपश्चिमी राजस्थानशुष्क जलवायु, केम्बो ऑर्थिड्स, केल्सी ऑर्थिड्स
2एण्टीसोलपश्चिमी राजस्थानशुष्क एवं अर्द्धशुष्क, टोरी सामेन्ट्स, डस्ट-फ्लूबेन्ट्स, राजस्थान में सर्वाधिक विस्तार
3अल्फीसोलपूर्वी मैदानी भागआर्द्र और उपआर्द्र, हेल्पुस्ताल्फस
4वर्टीसोलदक्षिणी पूर्वी राजस्थान, हाड़ौतीआर्द्र और अति आर्द्र, पेल्युस्टर्ट्स, क्रोमस्टर्ट्स, झालावाड़, कोटा, बूँदी, बारां
5इन्सेप्टीसोलदक्षिणी राजस्थानअर्द्धशुष्क से आर्द्र, उस्टोकेट्स, भारत में सर्वाधिक विस्तार

मृदा की समस्याएँ

  • मृदा अपरदन: कृषि का प्रथम शत्रु, वायु द्वारा (सर्वाधिक: जैसलमेर), जल द्वारा चादरी अपरदन (सिरोही, राजसमंद), अवनालिका अपरदन (चम्बल बेसिन)
  • लवणीयता: अधिक सिंचाई से सफेद परत, IGNP + नर्मदा नहर, जिप्सम व रॉक फॉस्फेट
  • क्षारीयता: pH 8 से अधिक, ढेंचा व ग्वार, जिप्सम
  • मृदा अवक्षयण: उर्वरता में कमी, रासायनिक खाद, जैविक खाद
  • मरूस्थलीकरण: पवन क्षरण > वनस्पति क्षरण > जल कटाव, वृक्षारोपण
  • सेम की समस्या: हनुमानगढ़, गंगानगर, सफेदा/यूकेलिप्टस, बडोदवल (हनुमानगढ़)

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

  • 19 फरवरी 2015, सूरतगढ़ कृषि फार्म (गंगानगर), PM मोदी
  • ध्येय वाक्य: स्वस्थ धरा — खेत हरा
  • हिस्सेदारी: केन्द्र 75 : राज्य 25
  • राजस्थान बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड: 22 दिसम्बर 2016
  • सर्वाधिक बंजर भूमि: जैसलमेर

भूमि सुधार कानून

  • राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीरदारी पुनर्ग्रहण अधिनियम — 1952
  • राजस्थान जागीरदारी एवं विश्वेदारी उन्मूलन अधिनियम — 1959
  • राजस्थान काश्तकारी अधिनियम — 15 अक्टूबर 1955
  • राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम — 23 मई 1956

मृदा संरक्षण की विधियाँ

  • मल्च बनाना, वेदिका निर्माण, समोच्च रेखीय रोधिकाएँ, समोच्च रेखीय जुताई
  • भिन्न-भिन्न फसलें उगाना, रक्षक मेखलाएँ, वृक्षारोपण

भूमि शब्दावली

शब्दअर्थ
माल भूमिकाली उपजाऊ भूमि
हकत-बहतजोती जाने वाली भूमि
चाही भूमिसिंचित भूमि
बारानी भूमिअसिंचित (वर्षा पर आधारित)
मगरापहाड़ी भूमि
खसराभूमि का क्रमांक
जमाबंदीखेत का लेखा-जोखा

अध्याय 14: राजस्थान की जैव विविधता

जैव विविधता संरक्षण

  • जैव विविधता शब्द: वाल्टर जी. रोजेन (1985)
  • प्रथम पृथ्वी सम्मेलन: 1992, रियो-डी-जेनोरियो
  • जैव विविधता के जनक: एडवर्ड विल्सन
  • IUCN: 1948, मुख्यालय ग्लांड (स्विट्जरलैंड)
  • रेड डाटा बुक: IUCN, पहला संस्करण 1972
  • वन्य जीव संरक्षण अधिनियम: 1972 (राजस्थान में 1973)

राजस्थान में जैव विविधता

श्रेणीसंख्या
राष्ट्रीय पार्क3
टाइगर रिजर्व5
वन्य जीव अभयारण्य26
जन्तुआलय5
मृग वन7
आर्द्रभूमि (रामसर)2
कन्जर्वेशन रिजर्व37
जैव विविधता स्थल5
आखेट निषिद्ध क्षेत्र33

नेशनल पार्क

क्र.नेशनल पार्कस्थापनाक्षेत्रफल (नवीन)
1रणथम्भौर1980289 वर्ग किमी
2केवलादेव198128.73 वर्ग किमी
3मुकुन्दरा हिल्स2012200 वर्ग किमी

1. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान

  • जिला: सवाई माधोपुर, अभयारण्य दर्जा: 1955
  • राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय पार्क व प्रथम बाघ संरक्षण परियोजना
  • टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट: 1973, राष्ट्रीय पार्क दर्जा: 1980
  • विश्व बैंक सहयोग से इको डवलपमेंट प्रोग्राम: 1996
  • बाघ परियोजना के जनक: फतेह सिंह राठौड़
  • उत्तर में बनास, दक्षिण में चम्बल नदी
  • त्रिनेत्र गणेश मंदिर, झूमर बावड़ी, कुक्कर घाटी, रणथम्भौर दुर्ग
  • काला गरुड़, लाल सिर वाले तोते
  • राजस्थान की प्रथम STPF (स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स)

2. केवलादेव घना पक्षी विहार राष्ट्रीय उद्यान

  • जिला: भरतपुर, पक्षियों का स्वर्ग
  • राज्य की पहली वन्य जीव प्रयोगशाला
  • सुनहरा त्रिकोण (जयपुर-दिल्ली-आगरा)
  • अभयारण्य: 1956, राष्ट्रीय पार्क: 1981
  • राजस्थान की पहली रामसर साइट (1981)
  • राज्य की एकमात्र मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड साइट
  • 1985 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल
  • राज्य का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान (28.73 वर्ग किमी)
  • गंभीर व बाणगंगा नदी के संगम पर
  • डॉ. सलीम अली की कार्यस्थली
  • साइबेरियन क्रेन, चकौर, लाल गर्दन के तोते, अजगर, कदम्ब के पेड़

3. मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान

  • जिले: कोटा, झालावाड़, चित्तौड़, बूँदी
  • 9 जनवरी 2012 को राष्ट्रीय पार्क दर्जा
  • राज्य का तीसरा नेशनल पार्क व तीसरी बाघ परियोजना (2013)
  • पुराना नाम: दरा अभयारण्य
  • गागरोनी तोतों (अलेक्जेण्ड्रीया पेराकिट) के लिए प्रसिद्ध

टाइगर रिजर्व (5)

क्र.टाइगर रिजर्वस्थितिक्षेत्रफलघोषित
1रणथम्भौरसवाई माधोपुर, करौली, बूँदी1411.29 वर्ग किमी1973 (पहला)
2सरिस्काअलवर, कोटपूतली-बहरोड, जयपुर1213 वर्ग किमी1978 (दूसरा)
3मुकुन्दरा हिल्सकोटा, बूँदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़759.99 वर्ग किमी2013 (तीसरा)
4रामगढ़ विषधारीबूँदी, कोटा, भीलवाड़ा1501.89 वर्ग किमी2022 (चौथा), सबसे बड़ा, भारत का 52वाँ
5धौलपुर-करौलीधौलपुर, करौली599.64 वर्ग किमी22 अगस्त 2023 (पाँचवाँ), सबसे छोटा, भारत का 54वाँ

वन्य जीव अभयारण्य (26)

क्र.अभयारण्यजिलाविशेष
1सरिस्काअलवर, कोटपूतली-बहरोड, जयपुर1955, राज्य की दूसरी बाघ परियोजना (1978), हरे कबूतर, जंगली सुअर
2राष्ट्रीय मरू उद्यानजैसलमेर, बाड़मेर1980, सबसे बड़ा (3162 वर्ग किमी), गोडावण, आकल वुड फॉसिल पार्क
3राष्ट्रीय चम्बल घड़ियालकोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर1978, एकमात्र नदी अभयारण्य
4तालछापरचूरू1971, कृष्ण मृग, मेथा घास, शेखावाटी का एकमात्र
5सवाई मानसिंहसवाई माधोपुररणथम्भौर से सटा
6सवाई माधोपुरसवाई माधोपुर
7जवाहर सागरकोटा, बूँदी, चित्तौड़गढ़जलीय जीव, घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुआ, गांगेय डॉल्फिन
8शेरगढ़बारांसाँपों की शरणस्थली, परवन नदी, काला भेड़िया
9भैंसरोड़गढ़चित्तौड़गढ़घड़ियाल, मानदेसरा का पठार, चम्बल व बामनी
10बस्सीचित्तौड़गढ़चीतलों की चहल-पहल, अरावली व विध्यांचल मिलन, बामनी व औराई
11सीतामाताप्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, सलूम्बरसर्वाधिक जैव विविधता, जड़ी-बूटियाँ, बड़ी तालाब (जियान सागर)
12सज्जनगढ़उदयपुरसबसे छोटा (5.19 वर्ग किमी), उड़न गिलहरी, सागवान, चीतल की मातृ भूमि
13जयसमंदसलूम्बरएन्टीलोप चौसिंगा, रूठी रानी का महल, जाखम बाँध, जलचरों की बस्ती
14फुलवारी की नालउदयपुरमानसी व वाकल नदी का उदगम, सर्वाधिक जंगली मूंग
15टॉडगढ़ रावलीब्यावर, राजसमंद, पालीजेम्स टॉड के नाम पर, कमली घाट, गोरम घाट
16कुम्भलगढ़राजसमंद, उदयपुर, पालीसर्वाधिक भेड़िये, चौसिंगा (घंटेल), रणकपुर जैन मंदिर
17माउण्ट आबूसिरोहीसर्वाधिक ऊँचाई, डिकिल्पटेरा आबूएसिस, खमनौर की पहाड़ी (बनास उद्गम), प्रथम इको सेंसिटिव जोन
18रामसागरधौलपुर1955, मीठे पानी के मगरमच्छ, मछलियाँ, साँप, मूंगे
19वन विहारधौलपुरसांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सुअर, भालू, लकड़बग्घा, तेंदुआ
20केसरबागधौलपुर1955, उदयभान सिंह, पक्षियों का घरौंदा
21बंध बारेठाभरतपुर
22नाहरगढ़जयपुरभालू रेस्क्यू सेंटर
23जमवारामगढ़जयपुरबाणगंगा नदी
24दराकोटा, झालावाड़1955, डांगलैंड, बघेरा, रीछ, चिंकारा, सांभर
25केलादेवीकरौली, सवाई माधोपुर1982, 16 मई 2022 को टाइगर रिजर्व, पाइथन/अजगर की शरणस्थली, रणथम्भौर के बाघों का जच्चा घर
26रामगढ़ विषधारीबूँदी, भीलवाड़ा

कन्जर्वेशन रिजर्व (37)

  • राजस्थान का पहला: बीसलपुर कन्जर्वेशन रिजर्व (टोंक, 2008)
  • सबसे बड़ा: बालेश्वर कन्जर्वेशन रिजर्व (221 km, नीम का थाना, सीकर)
  • सबसे छोटा: बीड मुहाना कन्जर्वेशन रिजर्व B (जयपुर, 0.10 km)
  • सर्वाधिक: बारां जिला (7)
  • 37वां: आसोप-भीलवाड़ा (27-08-2024)

आर्द्रभूमि (रामसर स्थल)

  • रामसर सम्मेलन: 2 फरवरी 1971, रामसर, ईरान
  • भारत रामसर कन्वेंशन का पक्षकार: 1 फरवरी 1982
  • भारत में वर्तमान रामसर स्थलों की संख्या: 101 (2026)
  • राजस्थान में वर्तमान रामसर स्थलों की संख्या: 5 (2026)
  • राजस्थान के रामसर स्थल: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, सांभर झील, मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, खीचन वेटलैंड तथा सिलीसेढ़ झील
क्रम रामसर स्थल जिला रामसर सूची में शामिल होने का वर्ष
1 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर 1981
2 सांभर झील जयपुर, अजमेर, नागौर क्षेत्र 1990
3 मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स उदयपुर 2025
4 खीचन वेटलैंड जोधपुर एवं फलोदी 2025
5 सिलीसेढ़ झील अलवर 2025
📌 परीक्षा अपडेट — 2026:
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स को Ramsar Site No. 2567 तथा खीचन वेटलैंड को Ramsar Site No. 2568 के रूप में 19 फरवरी 2025 को नामित किया गया। सिलीसेढ़ झील Ramsar Site No. 2581 है।

इस प्रकार राजस्थान में वर्तमान में कुल 5 Ramsar Sites हैं।

जिलों के शुभंकर

जिलाशुभंकरजिलाशुभंकर
श्रीगंगानगरचिंकाराहनुमानगढ़छोटा किलकिला
बीकानेरभट तीतरचूरूकाला हिरण
सीकरशाहीनझुंझुनूंकाला तीतर
जोधपुरकुरजांजैसलमेरगोडावण
बाड़मेरमरू लोमड़ीनागौरराजहंस
पालीतेंदुआसिरोहीजंगली मुर्गा
जालौरभालूअजमेरखड़मोर
भीलवाड़ामोरउदयपुरकव्व विष्णु
राजसमंदभेड़ियाडूंगरपुरजांघिल
बाँसवाड़ाजलपीपीप्रतापगढ़उड़न गिलहरी
चित्तौड़गढ़चौसिंगाअलवरसांभर
भरतपुरसारसकरौलीघड़ियाल
धौलपुरपंछीरासवाई माधोपुरबाघ
जयपुरचीतलदौसाखरगोश
टोंकहंसकोटाउदबिलाव
बूँदीसुखबबारांमगरमच्छ
झालावाड़गागरोनी तोता

अध्याय 15: राजस्थान के पर्यावरणीय मुद्दे (आपदा प्रबन्धन)

सहायता विभाग

  • स्थापना: 24 अक्टूबर 1951
  • 30 अप्रैल 1962: अकाल सहिता
  • 1964: खाद्य एवं सहायता विभाग से अलग
  • 26 जनवरी 2001 (गुजरात भूकम्प) के बाद Crisis Management से Risk Management
  • 30 अक्टूबर 2003: आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005

  • पारित: 23 दिसम्बर 2005, लागू: जनवरी 2006
  • नोडल एजेंसी: गृह मंत्रालय
  • NDMA: अध्यक्ष प्रधानमंत्री, मुख्यालय नई दिल्ली
  • SDMA: अध्यक्ष मुख्यमंत्री
  • DDMA: अध्यक्ष कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट

भूकम्प

क्षेत्रतीव्रताविस्तार
उच्च (Zone IV)6.0-6.9चौहटन (बाड़मेर), सांचौर (जालौर), तिजारा (खैरथल-तिजारा), नगर पहाड़ी (डीग)
मध्यम (Zone III)5.0-5.9पश्चिमी उदयपुर, डूंगरपुर, सिरोही, जालौर, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर, गंगानगर, झुंझुनूं, जोधपुर, सीकर, जयपुर, उत्तरी दौसा, भरतपुर
निम्न (Zone II)4.0 से कमशेष राजस्थान

प्रमुख भूकम्प:

  • 15 अगस्त 1906: थार रेगिस्तान (M6.2) — सबसे बड़ा
  • 18 मई 1974: पोखरण परमाणु परीक्षण
  • 11 मई 1998: पोखरण परमाणु परीक्षण
  • 26 जनवरी 2001: भुज (गुजरात) — सम्पूर्ण राजस्थान प्रभावित
  • 10 अगस्त 2003: शाहपुरा (जयपुर)
  • 2010: अलवर, अजमेर, राजसमंद

बाढ़

  • प्रकार: भीषण (50%+ अधिक वर्षा), मध्यम (25-50% अधिक)
  • प्रवण क्षेत्र: लूनी बेसिन, चम्बल बेसिन, बाणगंगा बेसिन, घग्घर बेसिन
  • इतिहास: 1981 (जयपुर, टोंक, नागौर, सवाईमाधोपुर), 2006 कवास (बाड़मेर), 2012 (टोंक, सवाई माधोपुर, झुंझुनूं, सीकर, दौसा), 2014 (दौसा, नागौर, अजमेर), 2015 (जालौर, झालावाड़, बारां, डूंगरपुर), 2016 (मध्य, दक्षिण, पश्चिमी राजस्थान)

सूखा एवं अकाल

  • तीजों कुरियों आठों काल: हर 3 वर्ष छोटा अकाल, हर 8वें वर्ष भयंकर अकाल
  • प्रचंड सूखा: 50% कम वर्षा, सामान्य सूखा: 25% कम वर्षा
  • अकाल प्रकार: अन्नकाल, जलकाल, तृणकाल, त्रिकाल
आवृत्तिजिले
3 साल में 1 बारजैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, सिरोही (अधिकतम सूखा)
4 साल में 1 बारगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, नागौर, अजमेर, बूँदी, डूंगरपुर
5 साल में 1 बारझुंझुनूं, सीकर, अलवर, जयपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, पाली, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा
6 साल में 1 बारटोंक, कोटा, बारां, झालावाड़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, प्रतापगढ़
8 साल में 1 बारभरतपुर, धौलपुर (न्यूनतम सूखा)

प्रमुख अकाल: चालीसा अकाल (1783), पंचकाल (1812-13), सहसा भदुसा (1843-44), छप्पिनया अकाल (1899-1900), 1987 का त्रिकाल, 2002-03 (100 वर्ष का भीषण)

मरुस्थलीकरण

  • राजस्थान में मरुस्थलीकरण में योगदान: 62.06%
  • कारण: वनोन्मूलन, सूखा, जलवायु, भू-क्षरण, जनसंख्या वृद्धि, वायु अपरदन, पशुचारण, भूजल गिरावट
  • मरूस्थल का विस्तार: 12 जिले (नए 16 जिले)
  • विश्व मरुस्थलीकरण रोकथाम दिवस: 17 जून
  • 2019 में भारत ने COP-14 की मेजबानी की

आपदा प्रबंधन के सरकारी प्रयास

कार्यक्रम/संस्थाविवरण
राजस्थान राहत कोष20 जनवरी 2006
प्राकृतिक आपदा कोष1990-91, केन्द्र 31 करोड़ + राज्य 93 करोड़, अप्रैल 1995
फूड स्टैम्प योजना15 अगस्त 2004, 10 क्विंटल गेहूं प्रति ग्राम पंचायत
सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)1974-75, 75:25, 11 जिले, 32 खण्ड
मरू विकास कार्यक्रम (DDP)1977-78, 75:25, 16 जिले, 85 खण्ड
जलधारा कार्यक्रम1994, सीमान्त किसानों को पम्पसेट
काम के बदले अनाज14 नवम्बर 2014, मनमोहन सिंह, 150 जिले
चारा समर्थन मूल्य2 नवम्बर 2002, राजस्थान देश का एकमात्र राज्य
टिड्डी आक्रमण13 मार्च 2020, 8 जिले, 908 गाँव अभावग्रस्त
टिड्डी चेतावनी संगठनमुख्यालय जोधपुर
CAZRI1959, जोधपुर, 5 उपकेन्द्र
AFRI1987, जोधपुर
ऑपरेशन खेजड़ा1991, मरूस्थल प्रसार रोकना
मरू गोचर योजना2003-04, 75:25, 10 जिले
बंजर भूमि व चारागाह विकास बोर्ड22 दिसम्बर 2016, पुनर्गठन 11 फरवरी 2022
आपदा मित्र योजनागृह मंत्रालय, 13 जिले, 4700 स्वयंसेवक
गवर्नर रिलीफ फण्ड14 मार्च 1973

अध्याय 16: राजस्थान की जनसंख्या

जनगणना 2011 (15वीं)

विवरणआँकड़े
राजस्थान की जनसंख्या6.85 करोड़ (68,548,437)
भारत की जनसंख्या का5.66%
विश्व की जनसंख्या का1.6%
जनसंख्या के आधार पर देश में स्थान7वाँ (2014 के बाद, तेलंगाना पृथक होने पर)
दशकीय वृद्धि दर21.3% (भारत: 17.7%)
जनसंख्या घनत्व200 व्यक्ति/वर्ग किमी (भारत: 382)
लिंगानुपात928 (भारत: 943)
बाल लिंगानुपात888 (भारत: 919)
साक्षरता66.1% (भारत: 74.04%)
पुरुष साक्षरता79.20%
महिला साक्षरता52.1%
शहरी जनसंख्या24.87% (भारत: 31.16%)
ग्रामीण जनसंख्या75.13%

सर्वाधिक/न्यूनतम जिले (2011)

श्रेणीसर्वाधिकन्यूनतम
जनसंख्याजयपुर (66.36 लाख)जैसलमेर (6.69 लाख)
जनघनत्वजयपुर (595)जैसलमेर (17)
लिंगानुपातडूंगरपुर (994)धौलपुर (846)
बाल लिंगानुपातबाँसवाड़ा (934)झुंझुनूं (837)
साक्षरताकोटा (76.06%)जालौर (54.9%)
पुरुष साक्षरताझुंझुनूं (86.9%)प्रतापगढ़ (66.5%)
महिला साक्षरताकोटा (65.9%)जालौर (38.5%)
दशकीय वृद्धि दरबाड़मेर (32.5%)श्रीगंगानगर (10%)
शहरीकरणकोटा (60.31%)डूंगरपुर (6.31%)

अनुसूचित जाति व जनजाति (2011)

विवरणSCST
कुल जनसंख्या1.22 करोड़0.92 करोड़
राजस्थान में %17.83%13.48%
भारत में %16.6%8.6%
सर्वाधिक जनसंख्याजयपुर (10.03 लाख)उदयपुर (15.25 लाख)
सर्वाधिक %गंगानगर (36.58%)बाँसवाड़ा (76.38%)

धर्म (2011)

धर्मप्रतिशतसर्वाधिक जिला
हिन्दू88.49%दौसा
मुस्लिम9.07%जैसलमेर
सिक्ख1.27%श्रीगंगानगर
जैन0.91%उदयपुर
ईसाई0.14%बाँसवाड़ा
बौद्ध0.02%अलवर

जनसंख्या नीति

  • राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000: 15 फरवरी 2000, अध्यक्ष डॉ. M.S. स्वामीनाथन
  • राजस्थान की प्रथम जनसंख्या नीति: 20 जनवरी 2000, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
  • लक्ष्य: 2010 तक 2.1%, 2045 से 2070 तक स्थिर
  • भारत की प्रथम जनसंख्या नीति: 16 अप्रैल 1976, डॉ. करणी सिंह
  • राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग: 11 मई 2000, अध्यक्ष प्रधानमंत्री

जनगणना 2021 (16वीं)

  • थीम: जन भागीदारी से जनकल्याण
  • पहली डिजिटल जनगणना, स्व-गणना का प्रावधान
  • महारजिस्ट्रार: श्री मृत्युंजय कुमार नारायण
  • 31 प्रश्न, ट्रांसजेंडर मुखिया की जानकारी पहली बार

अध्याय 17: राजस्थान की खनिज सम्पदा

खनिज विविधता में राजस्थान का प्रथम स्थान — 'खनिजों का अजायबघर/संग्रहालय'
खनिज भण्डारण में द्वितीय — अरावली 'खनिजों का भण्डारगृह'
खनिज उत्पादन में तृतीय (ओडिशा, छत्तीसगढ़ के बाद)
81 प्रकार के खनिज, 58 का खनन

राजस्थान का स्थान

श्रेणीस्थान
खनिज विविधताप्रथम
खनिज भण्डारणद्वितीय
खनिज उत्पादनतृतीय
अधात्विक खनिज उत्पादनप्रथम
लौह खनिज उत्पादनचतुर्थ
अप्रधान खनिज उत्पादनप्रथम

धात्विक खनिज

खनिजस्थानप्रमुख क्षेत्र
लौह अयस्कजयपुर (मोरिजा-बनोला), उदयपुर (नाथरा की पाल), भीलवाड़ा (जहाजपुर), दौसा (नीमला-रायसेला), बूँदी (लोहारपुर), झुंझुनूं (सिंघाना), डूंगरपुर (लौहारिया), सीकर (नीम का थाना), करौली (देवरोली)
तांबाद्वितीय (MP प्रथम), भण्डार प्रथम (54%)खेतड़ी (झुंझुनूं) — मदान-कुदान, कोलिहान, चाँदमारी; खो-दरीबा (अलवर); पादर की पाल (डूंगरपुर); गोलिया (सिरोही); अंजनी (उदयपुर); हनोतिया (अजमेर); रघुनाथगढ़ (सीकर)
सीसा-जस्ताएकाधिकार (89% भण्डार)जावर (उदयपुर) — सबसे पुरानी खान; राजपुरा-दरीबा (राजसमंद); रामपुरा आगुचा (भीलवाड़ा); कायड (अजमेर); चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)
चांदीप्रथम (86% भण्डार)जावर (उदयपुर) — देश की सबसे बड़ी; रामपुरा आगुचा (भीलवाड़ा); राजपुरा-दरीबा (राजसमंद); कायड (अजमेर)
सोनाबाँसवाड़ा (आनन्दपुरा भूकिया), अजमेर (घुधरा घाटी), दौसा (सरपंच की ढाणी), अलवर (खेड़ा मुंडियावास)
मैगनीजबाँसवाड़ा (सर्वाधिक), भीलवाड़ा (हम्मीरगढ़), उदयपुर, राजसमंद
टंगस्टननागौर (रैवत की पहाड़ी-डेगाना), सिरोही (वाल्दा), पाली (पादराला), जयपुर (डगनवाड़ा)

अधात्विक खनिज

खनिजस्थानप्रमुख क्षेत्र
अभ्रक (MICA)भीलवाड़ा (सर्वाधिक, सबसे बड़ी मण्डी), अजमेर, जयपुर, उदयपुर, टोंक
जिप्समप्रथम (99% उत्पादन, 81% भण्डार)बीकानेर (जामसर — सबसे बड़ी खान), नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, गंगानगर
रॉक फॉस्फेटप्रथम (93%)उदयपुर (झामर कोटडा — सबसे बड़ा), जैसलमेर, बाँसवाड़ा, जयपुर, अलवर
पोटाशहनुमानगढ़ (सतीपुरा), बीकानेर (लखासर), गंगानगर, चूरू, नागौर
एस्वेस्टॉसप्रथमउदयपुर (देवपुरा, ऋषभदेव), राजसमंद (देवगढ़, आमेट)
फेल्सपारप्रथमअजमेर (मकेररिया), भीलवाड़ा (आसींद), ब्यावर (मसूदा), जयपुर
फ्लोराइटद्वितीय (गुजरात प्रथम)डूंगरपुर (मांडो की पाल, काहिला), जालौर, सीकर, उदयपुर
चूना पत्थरप्रथम (सीमेंट ग्रेड)चित्तौड़गढ़ (सर्वाधिक), जोधपुर (केमिकल ग्रेड), नागौर, जैसलमेर (स्टील ग्रेड)
इमारती बलुआ पत्थरप्रथमजोधपुर (प्रथम), धौलपुर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, बूँदी, कोटा
संगमरमरसबसे अमीरराजसमंद (सर्वाधिक उत्पादन), मकराना (सर्वोत्तम — डीडवाना-कुचामन), केवड़ा (उदयपुर — गुलाबी), ऋषभदेव (हरा), भैंसलाना (काला), खादरा की पाल (सतरंगी), देसूरी (नीला), पीथला (पीला)

ऊर्जा खनिज

कोयला

  • राजस्थान में केवल लिग्नाइट प्रकार का कोयला
  • प्रमुख क्षेत्र: बीकानेर (पलाना — सर्वश्रेष्ठ, बरसिंगसर, केसर-देसर), बाड़मेर (गिरल, जालिपा, कपूरडी), बालोतरा (सिणधारी, होइ, जोगेश्वर तला), नागौर (मेडतारोड, इन्दाबड़)
  • भारत में सर्वाधिक लिग्नाइट: तमिलनाडु > गुजरात > राजस्थान

पेट्रोलियम

  • राजस्थान भारत में कच्चे तेल का महत्वपूर्ण उत्पादक
  • भारत के कुल उत्पादन (29.36 MMT) में ~14.95% (4.39 MMT)
  • मंगला तेल क्षेत्र से व्यावसायिक उत्पादन: 29 अगस्त 2009
  • केवर्न इंडिया लिमिटेड (बाड़मेर-सांचौर बेसिन)
  • प्राकृतिक गैस: राजस्थान तृतीय स्थान (असम प्रथम)
  • पहला गैस कुआँ: डांडेवाला (जैसलमेर)
  • 4 प्रमुख बेसिन: बाड़मेर-सांचौर (सर्वाधिक), जैसलमेर, बीकानेर-नागौर, विध्यन

पचपदरा रिफाइनरी

  • शिलान्यास: 23 सितम्बर 2013, शुभारम्भ: 16 जनवरी 2018
  • स्थान: साजियाली (बालोतरा) — देश की 26वीं रिफाइनरी
  • देश की प्रथम BS-6 मानकों पर आधारित
  • उत्पादन: 9 MMT, हिस्सेदारी: HPCL 74% + राजस्थान सरकार 26%
  • लागत: 72,937 करोड़ (वर्तमान)

राजस्थान के एकाधिकार वाले खनिज

  • सीसा-जस्ता, वॉलस्टेनाइट, सेलेनाइट — 100% उत्पादन
  • चांदी, कैल्साइट, जिप्सम — ~99%
  • रॉक फॉस्फेट, एस्वेस्टॉस, टंगस्टन, संगमरमर, सोप स्टोन, सैंड स्टोन, बॉल क्ले — प्रथम स्थान

प्रमुख संस्थान

संस्थानस्थापनामुख्यालय
खान एवं भू-विज्ञान विभाग1949उदयपुर
RSMML1974उदयपुर
राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम27 सितम्बर 1979 (2003 में विलय)
राजस्थान राज्य पेट्रोलियम कॉरपोरेशन2008जयपुर
RSMET15 सितम्बर 2020जयपुर
हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड1966देवारी (उदयपुर)
हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड1967खेतड़ी (नीम का थाना)

खनिज नीतियाँ

  • प्रथम: 1978, द्वितीय: 1990, तृतीय: 1994, चतुर्थ: 2011, पंचम: 4 जून 2015
  • षष्ठम: 9 दिसम्बर 2024
  • लक्ष्य: GDP में खनिज क्षेत्र का योगदान 3.4% से 2029-30 तक 5%, 2046-47 तक 8%
  • राजस्व लक्ष्य: 2029-30 तक 3 गुना, 2047 तक 1 लाख करोड़
  • रोजगार: 2029-30 तक 50 लाख, 2047 तक 1 करोड़

अध्याय 18: ऊर्जा संसाधन

विद्युत क्षमता — दिसम्बर 2025 तक

श्रेणी क्षमता (MW)
तापीय7,830.00
जल विद्युत1,017.29
गैस600.50
केंद्रीय क्षेत्र से तापीय आवंटन2,197.47
केंद्रीय क्षेत्र से जल विद्युत आवंटन851.86
परमाणु ऊर्जा आवंटन806.74
पवन ऊर्जा4,416.12
बायोमास196.45
सौर ऊर्जा9,898.00
अन्य तापीय/जल विद्युत3,742.00
कुल अधिष्ठापित क्षमता 31,556.43 MW

📌 नवीनतम आधिकारिक डेटा: राजस्थान की कुल स्थापित विद्युत क्षमता दिसम्बर 2025 तक 31,556.43 MW हो गई थी। यह आंकड़ा राजस्थान Economic Review 2025-26 पर आधारित है।

थर्मल पॉवर प्लांट

प्रकारसंख्याप्लांट
STPP (1000+ MW)6सूरतगढ़ (पहला), कोटा (दूसरा), छबडा (तीसरा), कालीसिंध (चौथा), कवई, भादेश
क्रिटिकल (500+ MW/यूनिट)4सूरतगढ़, कालीसिंध, छबड़ा, कवई
UMPP (4000+ MW)0

सूरतगढ़ सुपर थर्मल

  • स्थापना: 1998, टुकराना गाँव, सूरतगढ़
  • संचालन: RVUNL, पानी: IGNP से
  • सर्वाधिक विद्युत उत्पादन
  • 8 इकाई: 250×4 + 660×2 = 2320 MW

अन्य प्रमुख थर्मल

  • कोटा थर्मल: 1240 MW (7 इकाई), राजस्थान का दूसरा सुपर, प्रथम कोयला आधारित
  • छबड़ा: 1320 MW (2×660), राजस्थान का प्रथम क्रिटिकल तकनीक
  • कालीसिंध: एशिया का सबसे ऊँचा कूलिंग टावर
  • गिरल लिग्नाइट: 250 MW, प्रथम लिग्नाइट गैसीकरण
  • बरसिंगसर: 250 MW (केन्द्र सरकार का प्रथम लिग्नाइट)

गैस आधारित पॉवर प्लांट

  • रामगढ़ गैस (जैसलमेर): 273.5 MW, 15 नवम्बर 1994 — राज्य सरकार का प्रथम
  • अन्ता (बारां): 420 MW, 1989, NTPC — राज्य का प्रथम गैस थर्मल
  • धौलपुर कम्बाइंड साइकल: 330 MW, मार्च 2007

जल विद्युत

  • अनास: 140 MW (बाँसवाड़ा)
  • जाखम: 54 MW (प्रतापगढ़)
  • इंदिरा गाँधी: 23 MW (IGNP)
  • चम्बल घाटी: 386 MW (50:50)
  • माही: 140 MW (45:55)
  • भाखड़ा-नांगल: राजस्थान 227 MW (15.2%)
  • व्यास: राजस्थान 408 MW

परमाणु ऊर्जा

  • रावतभाटा (चित्तौड़गढ़): 1965 स्थापना, 1972 प्रथम इकाई, कुल 7 इकाई (1880 MW), भारत का दूसरा परमाणु संयंत्र, सबसे बड़ा
  • नापला (बाँसवाड़ा): प्रस्तावित, 2800 MW (700×4)
  • नरौरा (UP): राजस्थान का हिस्सा 44 MW (10%)

गैर-परम्परागत ऊर्जा

  • RRECL: 9 अगस्त 2002 (REDA + RPCL का विलय)
  • राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024: 2029-30 तक 1.25 लाख MW, 115 GW नवीकरणीय + 10 GW भंडारण

सौर ऊर्जा

  • सौर ऊर्जा नीति बनाने वाला भारत का प्रथम राज्य: राजस्थान (2011)
  • सौर दिवस: 325, सौर विकरण: 6-7 kWh/m²/दिन
  • क्षमता: 142 GW, नीति लक्ष्य: 30 MW
  • वर्तमान स्थापित: 5,482.66 MW
  • सर्वाधिक सौर ऊर्जा संयंत्र: जोधपुर
  • प्रथम सौर पार्क: भड़ला (जोधपुर)
  • प्रथम सौर संयंत्र: मथानिया (जोधपुर)
  • सोलर एनर्जी एंटरप्राइजिंग जोन (SEEZ): हम्मादा क्षेत्र — पोकरण, बायतु, फलौदी
  • प्रथम सौर ऊर्जा से चलने वाली नाव: पिछोला झील
  • प्रथम सौर ऊर्जा गाँव: नौख (जैसलमेर)
  • पहला सौर ऊर्जा संचालित ATM: मेहंदीपुर बालाजी (दौसा)
  • प्रथम सौर ऊर्जा विद्युतीकरण रेलवे स्टेशन: गोरमघाट

पवन ऊर्जा

  • अनुमानित क्षमता (150 मी. हब): ~284 GW
  • वर्तमान स्थापित: 4,414.12 MW
  • प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना: अमर सागर (जैसलमेर, अगस्त 1999)
  • दूसरी: देवगढ़ (प्रतापगढ़, 2000)
  • निजी क्षेत्र की प्रथम: बीठड़ी (फलौदी, 2001)
  • प्रथम पवन ऊर्जा नीति: मार्च 2000

बायोमास

  • प्रथम बायोमास संयंत्र: पदमपुरा (गंगानगर)
  • सर्वाधिक बायोगैस संयंत्र: उदयपुर
  • बायोडीजल: जोजोबा/होहोबा/रतनजोत/जेट्रोपा (इजरायली पद्धति)
  • कोटा बायोगैस प्लांट: एशिया का सबसे बड़ा CBG (3000 किग्रा/दिन, 1200 घरों को बिजली)

राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड (RSEB)

  • स्थापना: 1 जुलाई 1957
  • 19 जुलाई 2000: 5 कंपनियाँ — RVUNL, RVPNL, JVVNL, JDVVNL, AVVNL
  • बजट 2020-21: चौथी वितरण कंपनी "कृषि विद्युत वितरण निगम" की घोषणा

RERA (राजस्थान विद्युत विनियामक प्राधिकरण)

  • स्थापना: 2 जनवरी 2000, जयपुर
  • कार्य: लाइसेंस, नियंत्रण, दर निर्धारण

अध्याय 19: कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र

कृषि की मुख्य विशेषताएँ

  • GSVA में योगदान: 26.92% (प्रचलित), 26.54% (स्थिर)
  • 62% कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर
  • 2024-25: कुल खाद्यान्न उत्पादन 267.67 लाख मीट्रिक टन
  • बाजरा, सरसों, कुल तिलहन, खार में देश में प्रथम
  • शुद्ध बोया गया क्षेत्र: 53.74%
  • औसत जोत का आकार: 2.73 हेक्टेयर
  • भारत का 11% कृषिगत क्षेत्रफल राजस्थान में

फसलें

ऋतुबुवाईकटाईफसलें
खरीफजून-जुलाईसितम्बर-अक्टूबरमूंगफली, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मोठ, तिल, कपास, गन्ना
रबीअक्टूबर-नवम्बरमार्च-अप्रैलगेहूं, जौ, सरसों, चना, जीरा, मेथी, अलसी
जायदमार्चजूनखरबूजा, तरबूज, ककड़ी, सब्जियाँ

प्रमुख फसलें

फसलस्थानउत्पादन (प्रथम)विशेष
बाजराखरीफअलवरदेश में प्रथम (38.98%), सर्वाधिक बोया जाने वाला खाद्यान्न, अनुसंधान केन्द्र: बाड़मेर, उत्कृष्टता: जोधपुर
गेहूंरबीगंगानगरदेश में 5वाँ, सर्वाधिक बोया क्षेत्र: हनुमानगढ़
सरसोंरबीश्रीगंगानगरदेश में प्रथम (46.63%), अनुसंधान केन्द्र: सेवर (भरतपुर)
ग्वारखरीफहनुमानगढ़देश में प्रथम (87.69%)
मूंगफलीखरीफबीकानेरदेश में द्वितीय
कपासखरीफहनुमानगढ़देश में 4th (7.95%), सर्वाधिक संभाग: बीकानेर
मक्काखरीफचित्तौड़गढ़देश में 10th, अनुसंधान केन्द्र: बाँसवाड़ा
ज्वारखरीफअजमेरदेश में 3rd, अनुसंधान केन्द्र: वल्लभनगर (उदयपुर)
चावलखरीफबूँदीअनुसंधान केन्द्र: बाँसवाड़ा
दलहननागौरदेश में 3rd (13.88%)
तिलहनबीकानेरदेश में प्रथम (22.78%)
गन्नागंगानगर

कृषि जलवायु क्षेत्र (10)

क्षेत्रजिलेखरीफरबी
I A - शुष्क पश्चिमी मैदानीजोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतराबाजरा, मोठ, तिलगेहूं, सरसों, जीरा
I B - उत्तरी-पश्चिमी सिंचितश्रीगंगानगर, हनुमानगढ़कपास-ग्वारगेहूं, सरसों, चना
I C - अति शुष्क आंशिक सिंचितबीकानेर, जैसलमेर, चूरू आंशिकबाजरा, मोठ, ग्वारगेहूं, सरसों, चना
II A - अंतःस्थलीय जलोत्सरणसीकर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामनबाजरा, ग्वार, दलहनसरसों, चना
II B - लूणी नदी अन्तर्वर्तीजालौर, सिरोही, पाली, ब्यावर आंशिकबाजरा, ग्वार, तिलगेहूं, सरसों
III A - अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानीजयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड, ब्यावरबाजरा, ग्वार, ज्वारगेहूं, सरसों, चना
III B - बाढ़ संभाव्य पूर्वी मैदानीअलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुरबाजरा, ग्वार, मूंगफलीगेहूं, सरसों, जौ, चना
IV A - अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदानीउदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, सिरोही आंशिकमक्का, दलहन, ज्वारगेहूं, चना
IV B - आर्द्र दक्षिणी मैदानीबाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़मक्का, चावल, ज्वार, उड़दगेहूं, चना
V - आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानीकोटा, बारां, बूँदी, झालावाड़ज्वार, सोयाबीनगेहूं, सरसों

कृषि अनुसंधान केन्द्र

केन्द्रस्थान
राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्रसेवर (भरतपुर), 20 अक्टूबर 1993
बाजरा अनुसंधान केन्द्रबाड़मेर (उत्कृष्टता: जोधपुर)
मक्का अनुसंधान केन्द्रबाँसवाड़ा
चावल अनुसंधान केन्द्रबाँसवाड़ा
ज्वार अनुसंधान केन्द्रवल्लभनगर (उदयपुर)
ईसबगोल अनुसंधान केन्द्रजोधपुर
CAZRIजोधपुर (1959)
AFRIजोधपुर (1987)
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थाजयपुर (8 अगस्त 1998)
केन्द्रीय बैर एवं खजूर अनुसंधान केन्द्रजोहड़बीड़ (बीकानेर)
केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्था (CIAH)बीछावाल (बीकानेर, 1993)
केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्रतबीजी (अजमेर, 2000)
राजस्थान ऑलिव कल्टीवेशन लिमिटेडदुगापुरा (जयपुर, 2007)

जैविक कृषि

  • भारत का प्रथम जैविक राज्य: सिक्किम (2016)
  • राजस्थान का एकमात्र जैविक जिला: डूंगरपुर
  • एकमात्र जैविक गाँव: घाटी गाँव (उदयपुर)
  • जैविक उत्कृष्टता केन्द्र: झालावाड़
  • जैविक अनुसंधान केन्द्र: जाखोड़ा (कोटा)
  • प्रथम ऑर्गेनिक फूड फेस्टिवल: 5-7 मई 2023, जवाहर कला केन्द्र (जयपुर)

E-NAM

  • शुरू: 14 अप्रैल 2016, अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल
  • राजस्थान में 145 मण्डियाँ
  • राज्य की प्रथम ई-नाम मण्डी: रामगंज (कोटा)

कृषक उपहार योजना

  • प्रारम्भ: 1 अक्टूबर 2021
  • राज्य स्तर: 2.5 लाख/1.5 लाख/1 लाख
  • खण्ड स्तर: 50/30/20 हजार
  • मण्डी स्तर: 25/15/10 हजार

अध्याय 20: पशुपालन

पशुगणना 2019 (20वीं)

विवरणआँकड़े
कुल पशुधन568.01 लाख
कुक्कुट146.23 लाख (82.23% वृद्धि)
देश के कुल पशुधन का10.60%
देश में स्थानद्वितीय (UP के बाद)
प्रति हजार व्यक्तियों पर पशुधन829
पशु धनत्व166

पशुधन विवरण

पशुसंख्यादेश में स्थानदेश का %सर्वाधिक जिलान्यूनतम जिला
बकरी2.08 करोड़प्रथम14%बाड़मेरधौलपुर
ऊँट2.13 लाखप्रथम84.43%जैसलमेरप्रतापगढ़
गधा23 हजारप्रथम18.91%बाड़मेरटोंक
भैंस1.37 करोड़द्वितीय12.47%जयपुरजैसलमेर
घोड़ा34 हजारतृतीय9.84%जालौरडूंगरपुर
भेड़79 लाखचतुर्थ10.64%बाड़मेरबाँसवाड़ा
गाय1.39 करोड़छठा7.24%बीकानेरधौलपुर

गाय की नस्लें

नस्लक्षेत्रप्रजनन केन्द्रविशेष
नागौरीनागौर, जोधपुर, बीकानेर, अजमेरनागौरसुहालक प्रदेश, मजबूत बैल, परबतसर पशु मेला
हरियाणवीहरियाणा सीमावर्तीकुम्हेर (डीग)
कांकरेजसिरोही, सांचौर, पाली, नागौर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौरचौहटन (बाड़मेर)कच्छ का रन, सबसे भारी, द्विप्रयोजनीय
थारपारकरबाड़मेर, फलौदी, जैसलमेर, बालोतरा, जोधपुर, जालौरचांदन (जैसलमेर)सर्वाधिक रोग प्रतिरोधक, थारी
मालवीबाँसवाड़ा, कोटा, झालावाड़, डूंगरपुरडग (झालावाड़)चन्द्रभागा व गोमती सागर पशु मेले
गिरअजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ारामसर (अजमेर)चितकबरी, अजमेरा/रैंडा
राठीश्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, जैसलमेरनोहर (हनुमानगढ़)राजस्थान की कामधेनु, सर्वाधिक दूध

भैंस की नस्लें

नस्लक्षेत्रविशेष
मुर्रा/खुण्डीजयपुर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा, भरतपुर, डीग, दौसामोटगुमरी (पाकिस्तान), सर्वाधिक दूध, सर्वाधिक वसा
भदावरीकरौली, धौलपुर, भरतपुरभदावरी क्षेत्र (UP), भूरा (तांबे जैसा)
मेहसानासिरोही, जालौर, बाड़मेर, बालोतरामेहसाना (गुजरात)
जाफराबादीडूंगरपुर, उदयपुर, सलूम्बर, सिरोही, जालौर, झालावाड़काठियावाड़ (गुजरात), सबसे शक्तिशाली मादा

बकरी की नस्लें

नस्लक्षेत्रविशेष
अलवरी/जखरानाजखराना (अलवर)सर्वश्रेष्ठ, सर्वाधिक दूध
बरबरी/बड़वारीअलवर, डीग, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुरसर्वाधिक सुन्दर
जमनापरीहाड़ौतीसबसे बड़ी
शेखावाटीसीकर, चूरू, झुंझुनूंकाजरी द्वारा 1959, बिना सींग
मारवाड़ीपश्चिम राजस्थानसबसे प्राचीन, सर्वाधिक
सिरोहीसिरोही (सर्वाधिक)
लोहीबाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, बीकानेरसर्वाधिक मांस
झरवाड़ीपूर्वी राजस्थान
परबतसरीनागौर, डीडवाना-कुचामन, अजमेर, जयपुरहरियाणा बीटल + सिरोही

ऊँट की नस्लें

नस्लक्षेत्रविशेष
नाचनासम (जैसलमेर)सबसे सुन्दर एवं सर्वश्रेष्ठ, BSF सेना
जैसलमेरीजोधपुर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरातेज दौड़, मतवाली चाल
गोमठजोधपुर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरातेज दौड़
बीकानेरीबीकानेर, हनुमानगढ़, गंगानगरभारी, बोझा ढोने, सर्वाधिक

घोड़ों की नस्लें

  • काठियावाड़ी: काठियावाड़ (गुजरात), युद्ध, अरबी जैसी
  • मालानी: सर्वश्रेष्ठ, सिंधी + काठियावाड़ी, पोलो
  • मारवाड़ी: सर्वाधिक, स्वामीभक्त

डेयरी विकास

  • डेयरी विभाग: 1973
  • RSDDC: 1975
  • RCDF: 1977, जयपुर, 'सरस' ब्रांड
  • त्रिस्तरीय ढांचा: RCDF (शीर्ष), जिला दुग्ध संघ, प्राथमिक दुग्ध समिति
  • सबसे बड़ी डेयरी: रानीवाड़ा (जालौर)
  • गंगमूल: हनुमानगढ़, उम्मूल: बीकानेर, वरमूल: जोधपुर
  • पद्मा डेयरी: अजमेर (सबसे पुरानी, 1971)
  • श्वेत क्रांति/ऑपरेशन फ्लड: 1970, वर्गीज कुरियन
  • विश्व दुग्ध दिवस: 1 जून, राष्ट्रीय दुग्ध दिवस: 26 नवम्बर
  • सबसे बड़ा दुग्ध पैकिंग केन्द्र: कोटपूतली
  • प्रथम डेयरी एवं फूड साइंस महाविद्यालय: उदयपुर

प्रमुख पशु मेले

मेलास्थान
मल्लीनाथ पशु मेलातिलवाड़ा (बालोतरा) — प्राचीनतम
बलदेव पशु मेलामेड़ता
गोमती सागर पशु मेलाझालावाड़
वीर तेजाजी पशु मेलापरबतसर (डीडवाना-कुचामन)
गोगाजी पशु मेलाहनुमानगढ़
जसवंत पशु मेलाभरतपुर
पुष्कर पशु मेलाअजमेर
चंद्रभागा पशु मेलाझालरापाटन
रामदेव पशु मेलामानासर (नागौर)

मत्स्य पालन

  • सर्वाधिक मछली उत्पादन: उदयपुर, बूँदी
  • सबसे बड़ा मछली उत्पादक बांध: कानोता (जयपुर)
  • राजस्थान का पहला मछली अभयारण्य: बड़ी तालाब (उदयपुर)
  • मत्स्य परीक्षण महाविद्यालय: उदयपुर
  • मत्स्य उत्पादन 2023-24: 91,349.43 मैट्रिक टन

अध्याय 21: औद्योगिक विकास

औद्योगिक क्षेत्र का महत्व

  • GSDP में योगदान: 28.21% (प्रचलित), 29.84% (स्थिर)
  • खनन: 11.99%, विनिर्माण: 42.27% (प्रचलित)
  • राज्य में 424 औद्योगिक क्षेत्र, 44,560+ इकाइयाँ

उद्योगों का वर्गीकरण

आधारप्रकारउदाहरण
कच्चा मालकृषि, खनिज, रसायन, पशु, इंजीनियरिंग, वनसूती वस्त्र, सीमेंट, उर्वरक, ऊन, मीटर, बीड़ी
उपयोगआधारभूत, पूँजीगत, मध्यवर्ती, उपभोक्ताइस्पात, मशीनरी, रंग, मोटर गाड़ियाँ
स्वामित्वसार्वजनिक, निजी, संयुक्त, सहकारीगंगानगर शुगर मिल्स, सीमेंट, पचपदरा, स्पिनफेड
पूँजी निवेशसूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद

प्रमुख उद्योग

सूती वस्त्र उद्योग

  • राजस्थान का प्रथम कृषि आधारित उद्योग, सबसे प्राचीन
  • राजस्थान का मैनचेस्टर: भीलवाड़ा
  • प्रथम सूती वस्त्र मिल: द कृष्णा मिल्स (1889, ब्यावर)
  • सार्वजनिक क्षेत्र: एडवर्ड मिल्स (1906), महालक्ष्मी मिल्स (1925), विजयनगर कॉटन मिल्स (1932)
  • सहकारी: गुलाबपुरा (1965), श्रीगंगानगर (1978), गंगापुर (1981)
  • स्पिनफेड: 7 मार्च 1992, संचालन 1 अप्रैल 1993

चीनी उद्योग

  • राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग
  • प्रथम शुगर मिल: द मेवाड़ शुगर मिल्स (1932, भोपालसागर, चित्तौड़गढ़)
  • श्रीगंगानगर शुगर मिल्स (1945, बीकानेर) — बहुउद्देशीय

सीमेंट उद्योग

  • भारत में सीमेंट उत्पादन में प्रथम: राजस्थान
  • सर्वाधिक कारखाने: चित्तौड़गढ़ जिला
  • प्रथम: ACC (1915, लाखेरी, बूँदी)
  • सबसे बड़ा व्हाइट सीमेंट: अल्ट्राटेक (खारिया खंगार, जोधपुर)
  • प्रथम व्हाइट सीमेंट: जे.के. व्हाइट (गोटन, नागौर, 1984)

रसायन उद्योग

  • उर्वरक: श्रीराम फर्टिलाइजर (रामनगर, कोटा) — सबसे बड़ा, चम्बल फर्टिलाइजर (गढेपान, कोटा)
  • नमक: सांभर साल्ट लिमिटेड (जयपुर), राजस्थान स्टेट केमिकल (डीडवाना), पंचभरा साल्ट (1960, बालोतरा)
  • आयोडीन: राजस्थान देश में द्वितीय
  • सर्वाधिक शुद्ध नमक: पचपदरा
  • नमक की सबसे बड़ी मण्डी: नावां (डीडवाना-कुचामन)

काँच उद्योग

  • सर्वाधिक काँच उत्पादन: धौलपुर
  • द हाईटेक प्रिसिजन ग्लास फैक्ट्री (1964, धौलपुर)
  • सेमकोर ग्लास इण्डस्ट्रीज (कोटा) — दक्षिण कोरिया सहयोग, TV पिक्चर ट्यूब
  • फ्लोर ग्लास सिंटर: भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा), सेंट गोबेन (फ्रांस)

सिरेमिक उद्योग

  • राजस्थान का पहला सिरेमिक जोन: 2014, खिलोट, नीमराना (कोटपूतली-बहरोड)
  • सिरेमिक कॉम्पलेक्स/पार्क: खारा (बीकानेर)

ऊन उद्योग

  • देश के कुल ऊन उत्पादन में प्रथम (47.89%)
  • एशिया की सबसे बड़ी ऊन मण्डी: बीकानेर
  • प्रमुख इकाइयाँ: स्टेट वूलन मिल्स (बीकानेर), विस्टेड स्पिनिंग मिल्स (चूरू, लाडनूं)
  • केन्द्रीय ऊन विकास बोर्ड: जोधपुर (1987)
  • केन्द्रीय भेड़ एवं अनुसंधान केन्द्र: मालपुरा (टोंक)

चमड़ा उद्योग

  • मुख्यतः जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, टोंक, जोधपुर
  • कशीदे वाली जूतियाँ: भीनमाल (जालौर)
  • UNO द्वारा चमड़ा उद्योग विकास: बडू गाँव (नागौर)
  • लेदर कॉम्पलेक्स: मानपुरा, माचेड़ी (जयपुर)

इंजीनियरिंग उद्योग

  • हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (1967, अजमेर) — चेकोस्लोवाकिया सहयोग
  • हिन्दुस्तान इन्स्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (1964, कोटा)
  • होंडा मोटर कार: खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा)
  • होंडा मोटरसाइकिल: टपूकड़ा (अलवर)
  • जे.के. टायर: कांकरौली (राजसमंद)
  • श्रीराम टायर: कोटा

वन उपज आधारित उद्योग

उद्योगस्थान
लकड़ी का सामानबस्सी (चित्तौड़गढ़), उदयपुर, सवाई माधोपुर, जोधपुर, बाड़मेर
अगरबत्तीजयपुर, अजमेर, अलवर
बीड़ीजोधपुर, कोटा, टोंक, चित्तौड़गढ़ (मयूर छाप बीड़ी — टोंक)
रेशमउदयपुर, बाँसवाड़ा, कोटा
तेंदू पत्ताप्रतापगढ़, उदयपुर, चित्तौड़, कोटा, झालावाड़
खसभरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक
महुआडूंगरपुर, बाँसवाड़ा, माही क्षेत्र
गोंदचौहटन (बाड़मेर), जोधपुर
कत्थाउदयपुर, चित्तौड़गढ़
बांसबाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर

RIICO (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम)

  • स्थापना: 1980 (पूर्व में RIMDC, 1969)
  • राज्य में औद्योगिक विकास की शीर्ष संस्था
  • 2023-24: 10 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित
  • सबसे बड़ा: कुंज बहारीपुरा (जयपुर, 491.04 हेक्टेयर)
  • सबसे छोटा: माल की टूस (उदयपुर, 11.76 हेक्टेयर)

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)

  • SEZ अधिनियम: 2005, लागू: 10 फरवरी 2006
  • राजस्थान में नया SEZ एक्ट: 2015
  • प्रथम एवं द्वितीय: जेम्स एंड ज्वैलरी SEZ (सीतापुरा, जयपुर)
  • महिन्द्रा मल्टी सेक्टोरल SEZ: अजमेर रोड (जयपुर)
  • 5 SEZ अधिसूचित/निर्माणाधीन: सोमानी (खुशखेड़ा), वास्टका (जयपुर), जेनपेक्ट (जयपुर), मानसरोवर (जोधपुर), RNB Infrastructure (बीकानेर)

DMIC (दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर)

  • दादरी (UP) से जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (महाराष्ट्र)
  • कुल लम्बाई: 1504 किमी, 6 राज्य
  • राजस्थान का 38% हिस्सा, ~60% क्षेत्रफल प्रभावित
  • राजस्थान में 5 नोड: खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना, जयपुर-दौसा, अजमेर-किशनगढ़, राजसमंद-भीलवाड़ा, पाली-मारवाड़
  • प्रथम चरण: 2 नोड विकसित (खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना, जोधपुर-पाली-मारवाड़)

राजस्थान लघु उद्योग निगम (RajSICO)

  • स्थापना: 3 जून 1961, मुख्यालय जयपुर
  • कार्य: लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता, प्रोत्साहन, विपणन
  • हाडवेयर टेकपार्क: कुकस (जयपुर)
  • हेण्डीक्राफ्ट पार्क: जोधपुर व जैसलमेर
  • मसाला पार्क: रामपुराभाटियान मथानिया (जोधपुर)
  • साइबर पार्क: जोधपुर
  • 4 EPIP: मानसरोवर (जयपुर), भिवाड़ी, बासनी (जोधपुर), भीलवाड़ा
  • 4 कंटेनर डिपो: सीतापुरा (जयपुर), बोरनाडा (जोधपुर), नीमराना (कोटपूतली-बहरोड)

राजस्थान वित्त निगम (RFC)

  • स्थापना: 1955, जयपुर
  • 31 मार्च 2024 तक: 84,595 इकाइयों को ₹8,918 करोड़ का ऋण
  • योजनाएँ: शिल्पबाड़ी, सेमफैक्स, टेक्नोशिल्प, गुडबोरोवर, युवा उद्यमिता प्रोत्साहन, सरल

राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022

  • जारी: 17 सितम्बर 2022, प्रभावी: 31 मार्च 2026
  • प्रदेश की पहली हस्तशिल्प नीति
  • लक्ष्य: 5 वर्षों में 50,000 नए रोजगार
  • ₹3 लाख तक ऋण पर 100% ब्याज राज्य सरकार

GI Tag (भौगोलिक संकेतक)

क्र.नामस्थान
1बगरू प्रिंटजयपुर
2बीकानेरी भुजियाबीकानेर
3ब्लू पॉटरीजयपुर
4ब्लू पॉटरी (लोगो)जयपुर
5कठपुतलीराजस्थान
6कठपुतली (लोगो)राजस्थान
7कोटा डोरियाकोटा
8कोटा डोरिया (लोगो)कोटा
9मकराना संगमरमरनागौर
10मोलेला मिट्टी कलानाथद्वारा (राजसमंद)
11मोलेला मिट्टी कला (लोगो)नाथद्वारा (राजसमंद)
12फुलकारीराजस्थान, पंजाब, हरियाणा
13सांगानेरी प्रिंटजयपुर
14थेवा कलाप्रतापगढ़
15पोकरण पॉटरीजैसलमेर
16सोजत मेहंदीपाली (सितम्बर 2021)
17पिछवाई कलानाथद्वारा (अगस्त 2023)
18जोधपुरी बंधेजजोधपुर (अगस्त 2023)
19कोफ्तगरीउदयपुर (अगस्त 2023)
20उस्ता कलाबीकानेर (अगस्त 2023)
21कशीदाकारी शाफ्टबीकानेर (अगस्त 2023)

अध्याय 22: सहकारिता

सहकारिता का इतिहास

  • विश्व में सहकारिता की शुरुआत: 1844, इंग्लैण्ड के लिंकाशायर मिल में रॉबर्ट ऑवन द्वारा — 'विश्व में सहकारिता के जनक'
  • भारत में सहकारिता के जनक: लॉर्ड कर्जन (1904, प्रथम सहकारी साख अधिनियम)
  • राजस्थान में सहकारिता आंदोलन: 1904, अजमेर
  • राजस्थान की प्रथम सहकारी समिति: अक्टूबर 1905, भिनाय (अजमेर)
  • 1910: केन्द्रीय सहकारी बैंक, अजमेर
  • 1915: सर्वप्रथम भरतपुर राज्य में सहकारी कानून
  • 1965: राज्य सहकारी समिति अधिनियम
  • 14 नवम्बर 2002: नया राज्य सहकारी समिति अधिनियम 2001 लागू
  • 97वां संविधान संशोधन 2011 (15 फरवरी 2012 से लागू)

संवैधानिक प्रावधान

भागअनुच्छेदप्रावधान
भाग-319(1)(ग)सहकारी समिति बनाने का अधिकार
भाग-443Bराज्य सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करें
भाग-9B243ZH-243ZTसहकारी समितियों का गठन, नियंत्रण

ग्रामीण सहकारी बैंक (त्रिस्तरीय)

  • शीर्ष: राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक, 14 अक्टूबर 1953)
  • जिला स्तर: 29 जिला सहकारी बैंक
  • प्राथमिक स्तर: प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ (कुल 8273)
  • अल्पकालीन साख: 5 वर्ष तक
  • दीर्घकालीन साख: 5-15 वर्ष (राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक, 26 मार्च 1957)

शहरी सहकारी बैंक

  • कुल 41 शहरी सहकारी बैंक
  • 6 महिला शहरी सहकारी बैंक (उदयपुर-2, जयपुर-2, कोटा-1, भीलवाड़ा-1)
  • 3 रेलवे शहरी सहकारी बैंक: जयपुर, जोधपुर, बीकानेर

राजफेड (राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ)

  • स्थापना: 26 नवम्बर 1957
  • कार्य: MSP पर खरीद, गोदाम, भण्डारण, PDS
  • झोटवाड़ा (जयपुर): पशु आहार फैक्ट्री, कीटनाशक दवाई फैक्ट्री

अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना

  • 2023-24: ~1 करोड़ परिवारों को मुफ्त राशन के साथ अन्नपूर्णा फूड पैकेट
  • 1-1 किलो दालें, चीनी, नमक, 1 लीटर तेल, मसाले (मिर्च 100g, धनिया 100g, हल्दी 50g)

कॉनफेड (राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड)

  • स्थापना: 27 मार्च 1967 — उपभोक्ता क्षेत्र की शीर्ष संस्था
  • 38 जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार पंजीकृत, 33 कार्यरत

महिला सहकारिता

  • राजपुताना महिला नागरिक सहकारी बैंक: 30 अगस्त 1995 (प्रथम महिला सहकारी बैंक)
  • मुख्यालय: जयपुर
  • वर्तमान में 6 महिला नागरिक सहकारी बैंक
  • अपना घर बचत योजना: 2001, प्रथम मिनी बैंक — अकोली ग्राम (जालौर)
  • 947 राजीविका महिला स्वांगीय विकास सहकारी समितियाँ पंजीकृत
  • 8.70 लाख+ महिलाएं लाभान्वित

प्रमुख योजनाएँ

योजनाविवरण
राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना10 अक्टूबर 2022, ग्रामीण दस्तकार, अकृषि कार्य, लघु-सीमांत कृषक
कृषि उपज रहन ऋण योजना1 जून 2020, लघु-सीमांत 1.5 लाख, अन्य 3 लाख, 3% ब्याज, 3 माह
स्वरोजगार क्रेडिट योजनागैर-कृषि गतिविधियों हेतु ₹50,000 तक, 5 वर्ष
महिला विकास ऋण योजना2020, 2 व्यक्तियों की गारंटी, ₹50,000, 5 वर्ष, 3% ब्याज
कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)15 मई 2020, ₹1 लाख करोड़, 3% ब्याज अनुदान
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सरबल योजना1 फरवरी 2019, ₹5/लीटर अनुदान
राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना1 जनवरी 2019, अष्टम चरण 1 फरवरी 2024, ₹5 लाख/₹2.50 लाख
राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना2019, 30 नवम्बर 2018 तक के बकाया, 2 लाख तक, 20.84 लाख किसान, ₹7888.20 करोड़
ज्ञान सागर ऋण योजना2002, 18-30 आयु, भारत 6 लाख, विदेश 10 लाख

सहकारिता में महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थासंख्या
संघ (फेडरेशन)23
मिल्क यूनियन24
जिला सहकारी बैंक29
प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक36
उपभोक्ता होलसेल भण्डार38
प्राथमिक कृषि ऋण दायी सहकारी समितियाँ8592
सहकारी समितियाँ42,283

अध्याय 23: परिवहन

सड़क परिवहन

  • 1949: 13,553 किमी, मार्च 2024: 3,17,121 किमी
  • सड़क घनत्व: 92.66 किमी/100 वर्ग किमी
  • 39,408 गाँव सड़क से जुड़े (91.09%)
  • सर्वाधिक सड़क घनत्व: डूंगरपुर, न्यूनतम: जैसलमेर
सड़क वर्गीकरणलम्बाई (किमी)
राष्ट्रीय राजमार्ग10,790
राज्य राजमार्ग17,376
मुख्य जिला सड़क14,372
अन्य जिला सड़क68,265
ग्रामीण सड़क2,06,318
कुल3,17,121

राष्ट्रीय राजमार्ग (52)

NHमार्गराजस्थान में लम्बाईविशेष
NH-44श्रीनगर-कन्याकुमारी27 किमी (धौलपुर)सबसे लम्बा, केवल 1 जिला
NH-48दिल्ली-मुंबई709.91 किमीस्वर्णिम चतुर्भुज, 8 जिले
NH-52संगरूर-अकोरा793.55 किमीराजस्थान का सबसे लंबा NH
NH-11म्याजलार-रेवाड़ी763.60 किमीदूसरा सबसे लंबा
NH-62पिंडवाड़ा-अबोहर726.57 किमीतीसरा सबसे लंबा
NH-25ब्यावर-मुनाबाव481.17 किमीपूर्णतः राजस्थान में सबसे बड़ा
NH-919रेवाड़ी-सोहाना5 किमीसबसे छोटा

एक्सप्रेस-वे

  • देश का प्रथम: गुड़गाँव-जयपुर एक्सप्रेस-वे
  • राजस्थान का प्रथम 6 लेन: जयपुर-किशनगढ़
  • 9 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित (कुल 2750 किमी)
  • सबसे बड़ा: जालौर-झालावाड़ (402 किमी)
  • सबसे छोटा: कोटपूतली-किशनगढ़ (181 किमी)
  • जयपुर-जोधपुर-पचपदरा (350 किमी): NHAI द्वारा

रेल परिवहन

  • राजस्थान में प्रथम रेल: अप्रैल 1874, बांदीकुई-दौसा से आगरा
  • प्रथम रेलवे कारखाना: 1879, अजमेर
  • बजट आवंटन 2024-25: ₹9,959 करोड़
  • विद्युतीकरण: 5,703 रेल किमी (97% ब्रॉडगेज)
  • अमृत स्टेशन योजना: 85 स्टेशन
  • 4 वंदे भारत: अजमेर-चंडीगढ़, जोधपुर-साबरमती, उदयपुर-जयपुर, उदयपुर-आगरा

रेलवे ज़ोन व मण्डल

  • 2 ज़ोन: उत्तर-पश्चिमी (जयपुर, 1 अप्रैल 2003), पश्चिमी-मध्य (जबलपुर)
  • 5 मण्डल: जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा

प्रमुख रेल सेवाएँ

सेवाविवरण
पैलेस ऑन व्हील्स26 जनवरी 1982, RTDC + भारतीय रेलवे, 2013 में उत्तर भारत की श्रेष्ठ लग्जरी रेन
रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स17 जनवरी 2009, RTDC + भारतीय रेलवे
हेरिटेज ऑन व्हील्स2003, शेखावटी, मीटर गेज, भाप इंजन
फैरी क्वीन

रेलवे के उपक्रम

  • सिमको वैगन फैक्ट्री: भरतपुर (31 जनवरी 1957)
  • पश्चिमी रेलवे क्षेत्रीय प्रबंधन केन्द्र: उदयपुर (भारत का सबसे बड़ा रेलवे मॉडल किट)
  • भारतीय रेलवे अनुसंधान एवं परीक्षण केन्द्र: पंचपदरा (बाड़मेर)
  • रेलवे विद्युत लोकोशेड: कोटा
  • रेलवे परीक्षण रैक: नावां (नागौर)
  • रेलवे प्रशिक्षण स्कूल: उदयपुर
  • रेलवे भर्ती मण्डल: अजमेर

महत्वपूर्ण तथ्य

  • एशिया का सबसे बड़ा मीटर गेज यार्ड: फुलेरा (जयपुर)
  • सौर ऊर्जा संचालित प्रथम रेलवे स्टेशन: गोरमघाट (राजसमंद)
  • राजस्थान का प्रथम महिला संचालित रेलवे स्टेशन: गांधीनगर (जयपुर)
  • भारत के सबसे स्वच्छ रेलवे स्टेशन: जयपुर, जोधपुर, दुगारपुर (WB)
  • राजस्थान का प्रथम Cash Less Railway Station: जयपुर
  • सबसे बड़ा रेलवे एलिवेटर: जोधपुर (भगत की कोठी)
  • रेलवे विहीन जिले: प्रतापगढ़
  • नैरोगेज: केवल धौलपुर जिले में
  • थार एक्सप्रेस: मुनाबाव (भारत) से खोखरापार (पाक), 1899 में शुरू, 1965 युद्ध के बाद बंद, 17 फरवरी 2006 को पुनः प्रारम्भ, 2019 में पुनः बंद

वायु परिवहन

  • शुरुआत: 1959, महाराजा उम्मेदसिंह, जोधपुर फ्लाइंग क्लब
  • ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट: नीमराना (प्रथम, 74% निजी + 26% राज्य/AAI)
  • अन्य ग्रीनफील्ड: शिवदासपुरा (जयपुर), गंगारी (जोधपुर), किशनगढ़ (अजमेर), कोटकासिम (अलवर-प्रस्तावित)

नागरिक हवाई अड्डे

हवाई अड्डास्थानविशेष
सांगानेर अंतर्राष्ट्रीयजयपुरराजस्थान का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय (29 सितम्बर 2005), देश का 14वां, अडानी ग्रुप को 50 वर्ष के लिए
महाराणा प्रतापडबोक (उदयपुर)प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय
जोधपुरजोधपुर
कोटाकोटा
बीकानेरबीकानेर
किशनगढ़अजमेरग्रीनफील्ड

सैन्य हवाई अड्डे (7)

  • नाल (बीकानेर) — एशिया का सबसे अच्छा भूमिगत एयरपोर्ट
  • सूरतगढ़, जैसलमेर, फलौदी, रातानाडा (जोधपुर), उत्तरलाई (बाड़मेर), ख्यार (अजमेर)

हवाई पट्टियाँ (22)

  • 18 सरकारी, 4 निजी
  • निजी: निवाई (टोंक, वनस्थली विद्यापीठ), बारां (अडानी), कांकरोली (राजसमंद, JK), पिलानी (झुंझुनूं, बिड़ला)

पाइपलाइन परिवहन

पाइपलाइनविवरण
HBJ गैस पाइपलाइनहजीरा (गुजरात) — बीजापुर (MP) — जगदीशपुर (UP), GAIL द्वारा; राजस्थान में: अन्ता (बारां), चम्बल फर्टिलाइजर (कोटा), सेमकोर ग्लास (कोटा)
जामनगर-लोनी LPG630 किमी, GAIL; राजस्थान में: आबू रोड, पाली, अजमेर, जयपुर, अलवर; 2 बस्टर: गांदेरी (अजमेर), जयपुर
सलाया-मथुरा क्रूड10 C, IOC; आबू रोड, अजमेर
विजयनगर-कोटा गैसगुना (MP) से गढ़ेपान (कोटा), केशोरायपाटन विद्युत संयंत्र
कांडला-भटिंडाHPCL, 1014 किमी
मुंदड़ा-भटिंडाHPCL + समस्त एनर्जी लिमिटेड

जयपुर मेट्रो

  • निर्माण शिलान्यास: 14 फरवरी 2011, संचालन: 3 जून 2015
  • ADB ऋण सहायता (फेज-1B)
  • फेज-1: मानसरोवर से बड़ी चौपड़ (फेज-1A: मानसरोवर-चांदपोल, फेज-1B: चांदपोल-बड़ी चौपड़, फेज-1C: बड़ी चौपड़-रामसपोर्ट नगर, फेज-1D: मानसरोवर-200 फीट बायपास)

अध्याय 24: पर्यटन

पर्यटन विभाग

  • स्थापना: 1956 (एक स्वतंत्र विभाग के रूप में)
  • उद्देश्य: पर्यटन नीतियों, कार्यक्रमों का क्रियान्वयन

RTDC (राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड)

  • गठन: 24 नवम्बर 1978
  • 74 आवास इकाइयाँ, 28 भोजन इकाइयाँ, 22 बार, 29 IMFL शॉप्स
  • परिवहन: पिंक सिटी बाई नाईट टूर (2006), 15 पैकेज टूर
  • नौकायन: सिलीसेढ़ (अलवर), कायलाना (जोधपुर), जयसमंद (सलूम्बर)
  • लाइट एंड साउंड शो: कुम्भलगढ़, चित्तौड़गढ़, गढ़सीसर, मीराबाई स्मारक, मचकुंड, जयनिवास उद्यान

RSHCL (राजस्थान राज्य होटल निगम लिमिटेड)

  • स्थापना: 7 जून 1965
  • 3 होटल: खासाकोठी (जयपुर), आनंदभवन (उदयपुर), अशोक (जयपुर)

RITMAN (राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट)

  • स्थापना: 29 अक्टूबर 1996, मुख्यालय जयपुर
  • कार्य: मानव संसाधन विकास, गाइड प्रशिक्षण

REXCO (राजस्थान एक्स-सर्विसमेन कॉर्पोरेशन)

  • पर्यटन विभाग की भर्तियाँ, पर्यटक सहायता बल

पर्यटन के उद्योग का दर्जा

  • 4 मार्च 1989: पर्यटन को उद्योग का दर्जा
  • राजस्थान: पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने वाला प्रथम राज्य
  • 2004-05: पर्यटन को जन उद्योग का दर्जा
  • 18 मई 2022: पर्यटन का पूर्ण उद्योग का दर्जा

पर्यटक आँकड़े (2024)

श्रेणीसंख्या (लाख)
घरेलू पर्यटक2280.12
अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक20.72
कुल2300.84

पर्यटन नीतियाँ

  • प्रथम पर्यटन नीति: 27 सितम्बर 2001
  • राजस्थान पर्यटन नीति 2020: 9 सितम्बर 2020
  • राजस्थान इको टूरिज्म पॉलिसी 2021: 15 जुलाई 2021
  • राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति 2022: 18 अप्रैल 2022
  • राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना 2022: 30 नवम्बर 2022
  • राजस्थान पर्यटन इकाई नीति 2024: 4 दिसम्बर 2024

राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण

  • गठन: मार्च 2011
  • अध्यक्ष: पर्यटन मंत्री (दया कुमारी)
  • 102 मेले चिन्हित, 42 पंजीकृत

UNESCO विश्व धरोहर स्थल

स्थलवर्षप्रकार
केवलादेव घना पक्षी विहार1985प्राकृतिक (प्रथम)
जंतर-मंतर, जयपुर2010सांस्कृतिक (प्रथम)
कालबेलिया नृत्य2010अमूर्त सांस्कृतिक (प्रथम)
6 पहाड़ी किले2013जैसलमेर, गागरोन, रणथम्भौर, चित्तौड़, आमेर, कुम्भलगढ़
जयपुर परकोटा6 जुलाई 2019सांस्कृतिक

प्रमुख पर्यटन सर्किट

  • मरू सर्किट (डेजर्ट रायंग्ल/मरू त्रिकोण): जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर
  • शेखावाटी सर्किट: झुंझुनूं, सीकर, चूरू
  • हाड़ौती सर्किट: कोटा, बूँदी, झालावाड़, बारां
  • ढूंढाड़ सर्किट: जयपुर, दौसा
  • मेवाड़ सर्किट: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा
  • मेरवाड़ा सर्किट: अजमेर, नागौर
  • बृज-मेवात सर्किट: अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक
  • वागड़ सर्किट: डूंगरपुर, बाँसवाड़ा
  • गोडवाड़ सर्किट: जालौर, पाली, सिरोही

प्रमुख मेले व उत्सव

मेला/उत्सवस्थानसमय
पुष्कर पशु मेलाअजमेरकार्तिक पूर्णिमा
ऊँट उत्सवबीकानेरजनवरी
मरू महोत्सवजैसलमेरजनवरी-फरवरी
डीग महोत्सवडीगफरवरी
गणगौर उत्सवजयपुरमार्च-अप्रैल
मेवाड़ उत्सवउदयपुरमार्च-अप्रैल
तीज उत्सवजयपुरजुलाई-अगस्त
पुष्कर मेलाअजमेरनवम्बर
कजली तीज मेलाबूँदीअगस्त
भृतहरि मेलाअलवरसितम्बर

नवीन पर्यटन पहल

  • Rising Rajasthan Summit: 9-11 दिसम्बर 2024, जयपुर, 1,320 MoU, ₹96,967.61 करोड़ निवेश, 2,02,607 रोजगार
  • ICONIC Destinations: आमेर-नाहरगढ़ (₹49.31 करोड़), जलमहल (₹96.61 करोड़)
  • राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट: 13-15 सितम्बर 2024
  • वेड इन इंडिया एक्सपो: 5 मई 2024 (देश में प्रथम)
  • थीमेटिक टूरिज्म: हेरिटेज, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, एडवेंचर, वन्यजीव, मरूस्थल, MICE

पर्यटन पुरस्कार

पुरस्कारतिथि
बेस्ट डेकोरिन एवं डिजाइन पुरस्कार10 फरवरी 2024, मुंबई
MICE टूरिज्म पुरस्कार30 अप्रैल 2024
सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज डेस्टिनेशन19 जुलाई 2024, अहमदाबाद
सर्वश्रेष्ठ वाइल्ड लाइफ होटल (कैसल झूमर बावड़ी)19 जुलाई 2024
पिल्ग्रिमेज डेस्टिनेशन ऑफ द ईयर27 जुलाई 2024, बेंगलुरु
बेस्ट बजटल मार्केटिंग बाई स्टेट31 अगस्त 2024, भोपाल
द मोस्ट प्रॉमिसिंग वेडिंग डेस्टिनेशन23 अक्टूबर 2024, पटना
ब्रांड कैरेवेन ऑफ द ईयर1 दिसम्बर 2024, पुणे
वेडिंग डेस्टिनेशन ऑफ द ईयर8 दिसम्बर 2024, हैदराबाद

अध्याय 25: राजस्थान की संस्कृति

राज्य के प्रतीक

प्रतीकविवरणदिनांक
राज्य वृक्षखेजड़ी (प्रोसोपिस सिनेरेरिया)31 अक्टूबर 1983
राज्य पुष्परोहिड़ा (टेकोमेला एण्डलेटा)31 अक्टूबर 1983
राज्य पक्षीगोडावण (क्रायोटिस नाइग्रिसेप्स)21 मई 1981
राज्य पशुचिंकारा (गजेला बेनेटी)22 मई 1981
राज्य पालतू पशुऊँट (केमेलस ड्रोमेडेरियस)19 सितम्बर 2014
राज्य गीतकेसरिया बालम आवोनी पधारों म्हारे देश22 जून 2017
राज्य नृत्यघूमर
राज्य शास्त्रीय नृत्यकथक
राज्य कविसूर्यमल्ल मिश्रण
राज्य खेलबास्केटबॉल1948
राज्य वाद्य यंत्रअलगोजा
राज्य मिठाईघेवर

लोक नृत्य

  • घूमर: राजस्थान का प्रमुख लोक नृत्य (महिलाओं द्वारा), शुभ अवसरों पर, शहनाई, ढोल, नगाड़ा
  • प्रकार: घूमर (महिलाएँ), घूमरिया (बालिकाएँ), लूर (गरासिया स्त्रियाँ)

हस्तशिल्प

हस्तशिल्पस्थानविशेष
बगरू प्रिंटजयपुर
सांगानेरी प्रिंटजयपुर
अजरख व मलीर प्रिंटबाड़मेर
आकोला का आजम प्रिंटचित्तौड़गढ़
बंधेजजोधपुर, जयपुर, बीकानेर, शेखावाटीलहरिया, पोमचा
कशीदाकारीसीकर, झुंझुनूंजरी, गोटे का काम (खण्डेला)
गलीचेजयपुर, टोंक, ब्यावर
नमदेमालपुरा (टोंक), लवाण (दौसा)
दरियाटांकला (नागौर)
फड़ चित्रशाहपुरा (भीलवाड़ा)जोशी परिवार
पिछवाईयाँनाथद्वाराकृष्ण लीलाओं का चित्रण
ब्लू पॉटरीजयपुरमानसिंह प्रथम (लाहौर से), सवाई रामसिंह द्वितीय (विकास), कृपाल सिंह शेखावत
टैराकोटामौलेला (नाथद्वारा), अलवर, बीकानेरकागजी (अलवर), सुनहरी (बीकानेर)
मीनाकारीजयपुरकुदरत सिंह
रमकड़ा उद्योगडूंगरपुरसोपस्टोन खिलौने
थेवा कलाप्रतापगढ़नाथूजी सोनी, महेश सोनी, जगदीश सोनी
उस्ता कलाबीकानेरऊँट की खाल पर चित्रकारी
कोफ्तगरीजयपुर, अलवर, उदयपुरलोहे पर सोने की तारकशी
कठपुतलीउदयपुर
पाव रजाईजयपुर

प्रमुख संस्कृतिक संस्थान

  • जवाहर कला केन्द्र (JKK): 1993, जयपुर
  • रवीन्द्र मंच: जयपुर (600 सीट मुख्य थिएटर, 3500 ओपन एयर, 125 मिनी थिएटर)

महत्वपूर्ण तथ्य

  • विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी: बागोर हवेली (उदयपुर)
  • विश्व का सबसे बड़ा चाँदी का पात्र: सिटी पैलेस (जयपुर)
  • सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय पन्ना मण्डी: जयपुर
  • कृषि रेशम/टसर उत्पादन: उदयपुर, बाँसवाड़ा, कोटा

अध्याय 26: यूनेस्को भू-पार्क एवं भू-धरोहर स्थल

भू-पार्क संकल्पना

यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क — एकल, एकीकृत भौगोलिक क्षेत्र जहाँ संरक्षण, शिक्षा और सतत विकास की समग्र अवधारणा के साथ अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक महत्व के स्थलों और परिदृश्यों का प्रबंधन किया जाता है।

राजस्थान में 12 भू-विरासत स्थल (GSI द्वारा)

क्र.स्थलविशेषताएँ
1जावर (उदयपुर)खनिज व जीवाश्म संपदा, टूरिज्म साइट
2रामगढ़ क्रेटर (बारां)165 मिलियन वर्ष पूर्व उल्कापिंड प्रभाव, 3 किमी व्यास, राजस्थान का प्रथम भू-विरासत स्थल
3आकल फॉसिल वुड पार्क (जैसलमेर)टेरोसोरस (डायनासोर) जीवाश्म, जुरासिक काल की द्विबीजपत्री लकड़ी
4जोधपुर ग्रुप मालाणी आग्नेय चट्टानें (जोधपुर)प्रीकैम्ब्रियन युग की आग्नेय गतिविधि
5वेल्डेड टफ (जोधपुर)मालानी ज्वालामुखीजैसे टीले, कांच, स्फटिक, फेल्डस्पार
6स्ट्रोमेटोलाइट पार्क (झामरकोटडा, उदयपुर)180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानें
7स्ट्रोमेटोलाइट पार्क (भोजुंडा, चित्तौड़गढ़)नीले-हरे शैवाल व कार्बोनेट चट्टानें
8ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट (सातूर, बूँदी)दक्षिण-पूर्वी राजस्थान, टेक्टोनिक रेखा, अरावली व हाड़ौती को अलग करता है
9गोसाण राजपुरा दरीबा (राजसमंद)नेशनल जियो हेरिटेज साइट, अरल उदासीन कार्बोनेट चट्टानें
10सैंड्रा ग्रेनाइट (पाली)900 मिलियन वर्ष पूर्व के विपुल आग्नेय शैल
11बरवा कांग्लोमरेट (पाली)क्लास्टिक तलछटी चट्टान, क्वाटर्जाइट व ग्रेनाइट नाइस कंकड़
12नेफेलाइन साइनाइट (किशनगढ़, अजमेर)होलोक्रिस्टलाइन प्लूटोनिक चट्टान, नेशनल जियो हेरिटेज साइट

राजस्थान में भू-विरासत संभावनाएँ

  • चंबल के बीहड़ स्थलाकृतियाँ
  • बैथोलिथ संरचना (आबू पर्वत)
  • जल पट्टी (सरस्वती नदी के भूगर्भिक अवशेष)
  • माइकाशिष्ट चट्टानें
  • लूनी व घग्घर नदियों का पाट
  • काली बेरी के चट्टानी भू-खण्ड
  • जयपुर व अजमेर के चट्टानी क्षेत्र

UNESCO विश्व धरोहर स्थल (राजस्थान)

  • 1985: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (प्राकृतिक)
  • 2010: जंतर-मंतर, जयपुर (सांस्कृतिक)
  • 2013: 6 पहाड़ी किले — गागरोन, आमेर, चित्तौड़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, जैसलमेर
  • 6 जुलाई 2019: जयपुर परकोटा (सांस्कृतिक) — भारत का दूसरा शहर (अहमदाबाद के बाद)
  • 29 सितम्बर 2016: जयपुर को यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटी का दर्जा
🔹 विशेषज्ञ जोड़: जंतर-मंतर के यंत्र — वृत सम्राट यंत्र, लघु सम्राट यंत्र, राम यंत्र, जयप्रकाश यंत्र, सम्राट यंत्र, दिशा यंत्र, रुवदिशिक यंत्र, शांत वृत।

📊 नवीनतम डेटा एवं महत्वपूर्ण अपडेट (2024-25)

📌 राजस्थान 2025 — महत्वपूर्ण तथ्य:
  • मुख्यमंत्री: भजनलाल शर्मा
  • राज्यपाल: हरिभाऊ बागडे
  • जिले: 41, संभाग: 7
  • कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किमी
  • जनसंख्या (2011): 6.85 करोड़
  • साक्षरता: 66.1%
  • लिंगानुपात: 928
  • वन क्षेत्र: 9.60% (अभिलेखित)
  • वनावरण: 4.84%
  • खनिज: 81 प्रकार, 58 का खनन
  • कुल विद्युत क्षमता: 26,325.19 MW
  • सौर ऊर्जा: 5,482.66 MW
  • पवन ऊर्जा: 4,414.12 MW
  • IGNP कुल लम्बाई: 649 किमी
  • सर्वाधिक वर्षा: झालावाड़
  • न्यूनतम वर्षा: जैसलमेर
  • सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल): जैसलमेर
  • सबसे छोटा जिला (क्षेत्रफल): धौलपुर
  • सर्वाधिक जनसंख्या: जयपुर
  • न्यूनतम जनसंख्या: जैसलमेर
🔹 परीक्षा हेतु अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
  • राजस्थान का सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल): जैसलमेर (38,401 वर्ग किमी)
  • सबसे छोटा जिला: धौलपुर (3,033 वर्ग किमी)
  • सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व: जयपुर (595)
  • न्यूनतम जनसंख्या घनत्व: जैसलमेर (17)
  • सर्वाधिक लिंगानुपात: डूंगरपुर (994)
  • न्यूनतम लिंगानुपात: धौलपुर (846)
  • सर्वाधिक साक्षरता: कोटा (76.06%)
  • न्यूनतम साक्षरता: जालौर (54.9%)
  • राजस्थान का राज्य पक्षी: गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
  • राज्य वृक्ष: खेजड़ी
  • राज्य पुष्प: रोहिड़ा
  • राज्य पशु: चिंकारा
  • राज्य पालतू पशु: ऊँट
⚠️ महत्वपूर्ण सूचना: यह HTML संस्करण पुस्तक "राजस्थान का भूगोल" (बूस्टर एकेडमी) की सम्पूर्ण सामग्री पर आधारित है। सभी अध्याय, तालिकाएँ, एवं महत्वपूर्ण तथ्य सम्मिलित हैं। नवीनतम डेटा एवं विशेषज्ञ जोड़ को अलग से चिह्नित किया गया है।